चंडीगढ़; 19 अगस्त 2026: मानसून के दौरान मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनने के साथ ही पंजाब डेंगू, मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों की निगरानी, रोकथाम और उपचार को मज़बूत कर रहा है। इन जनस्वास्थ्य उपायों के साथ-साथ, मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) पात्र परिवारों को बीमारी की स्थिति में कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाने में मदद कर रही है।
इस वर्ष की शुरुआत में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए सामुदायिक भागीदारी को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया था।
राज्य स्तरीय समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए निगरानी व जाँच को और मज़बूत करने तथा मच्छरों के प्रजनन स्थलों को ख़त्म करने पर विशेष ज़ोर दिया।
पंजाब में डेंगू के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। डेंगू के मामले 2021 में 23,389 से घटकर 2025 में 4,981 रह गए, जबकि मौतों की संख्या 55 से घटकर आठ हो गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने इस सुधार का श्रेय आंशिक रूप से सक्रिय घर-घर निगरानी अभियान को दिया, जिसके तहत पिछले संक्रमण सीज़न के दौरान करीब 1.5 करोड़ दौरे किए गए।
राज्य ने ‘हर शुक्रवार डेंगू ते वार’ अभियान को भी आगे बढ़ाया, जिसके तहत विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रत्येक शुक्रवार अपने आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण करने तथा कूलरों, गमलों, पानी की टंकियों और अन्य कंटेनरों में जमा पानी को हटाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इस संबंध में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए पूरे समुदाय की भागीदारी ज़रूरी है। रोकथाम की ज़िम्मेदारी केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रह सकती। हर घर, स्कूल और संस्थान को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कहीं भी जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का स्थान न बने।”
पंजाब ने जाँच सुविधाओं का भी विस्तार किया है। राज्य के 47 सेंटिनल सर्विलांस अस्पतालों में डेंगू और चिकनगुनिया की मुफ़्त एलिसा (एंज़ाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट अस्से) जाँच उपलब्ध है। मलेरिया के रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट और डेंगू की जाँच सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है।
इस बीच, डॉक्टरों ने लोगों को लगातार बने रहने वाले बुख़ार को नज़रअंदाज़ न करने और हर मानसूनी बुख़ार को सामान्य न मानने की सलाह दी है। ज़िला अस्पताल, मोहाली की मेडिकल विशेषज्ञ डॉ. शिफाली चौधरी (एमबीबीएस, एमडी) ने कहा, “मच्छर जनित बीमारियों के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने या उपचार में देरी करने से स्थिति गंभीर हो सकती है। लगातार बुख़ार, अत्यधिक कमज़ोरी, शरीर या जोड़ों में तेज़ दर्द, बार-बार उल्टी, असामान्य रक्तस्राव, साँस लेने में कठिनाई या शरीर में पानी की कमी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।”
बीमार पड़ने वाले मरीज़ों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक आर्थिक पहुँच भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के नवीनतम उपचार आंकड़ों के अनुसार, 351 लाभार्थियों ने 357 उपचारों का लाभ लिया, जिन पर 89,35,345 रुपये ख़र्च हुए।
इनमें से 250 मरीज़ों ने पी-टाइप अस्पतालों में 256 उपचार करवाए, जिन पर 75,02,250 रुपये ख़र्च हुए, जबकि 101 मरीज़ों ने जी-टाइप अस्पतालों में 101 उपचार करवाए, जिन पर 14,28,895 रुपये ख़र्च हुए। महिला लाभार्थियों की संख्या 194 रही, जिन्होंने 199 उपचार करवाए, जबकि पुरुष लाभार्थियों की संख्या 157 रही, जिन्होंने 158 उपचार करवाए। सबसे बड़ा आयु वर्ग 31–45 वर्ष का रहा, जिसमें 102 लाभार्थियों ने 105 उपचार करवाए। इसके बाद 46–60 वर्ष आयु वर्ग रहा, जिसमें 80 लाभार्थियों ने 80 उपचार करवाए।
डॉ. शिफाली चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना इलाज के ख़र्च को लेकर होने वाली चिंता को कम करके समय पर उपचार लेने में आने वाली आर्थिक बाधाओं को दूर कर सकती है।उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) पंजाब भर के लोगों को इलाज के ख़र्च का तत्काल बोझ उठाए बिना समय पर चिकित्सकीय देखभाल लेने में मदद कर रही है। जब किसी बीमारी के कारण आपातकालीन उपचार या अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत पड़ती है, तब कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हो सकती है।”
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के एमएमएसवाई आंकड़ों से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों से जुड़े उपचार की महत्त्वपूर्ण ज़रूरत का भी पता चलता है:
* कुल: मच्छर जनित बीमारियों के 357 उपचार, जिन पर 89.35 लाख रुपये का ख़र्च आया।
* डेंगू: उपचारों में सबसे बड़ा हिस्सा डेंगू का रहा, जिसमें डेंगू बुख़ार, डेंगू हेमरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम शामिल हैं।
* डेंगू बुख़ार: प्रमुख उपचार श्रेणियों में 51 उपचार शामिल रहे, जिनकी लागत 12.22 लाख रुपये, 25 उपचारों की लागत 9.11 लाख रुपये और 55 उपचारों की लागत 8.46 लाख रुपये रही।
* मलेरिया: जटिल मलेरिया सहित कई मामलों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया।
* चिकनगुनिया: चिकनगुनिया के भी कई उपचार मामले दर्ज किए गए।
* गंभीर मामले: कुछ गंभीर मरीज़ों को अतिरिक्त चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी, जिनमें रक्त चढ़ाना, एडवांस्ड इमेजिंग जाँच तथा किडनी फेलियर और गंभीर सेप्सिस जैसी जटिलताओं का उपचार शामिल रहा।
इसलिए,पंजाब में व्यापक रणनीति दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—निगरानी और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को ख़त्म करके मच्छर जनित संक्रमणों की रोकथाम करना तथा बीमारी की स्थिति में मरीज़ों को समय पर और किफ़ायती उपचार उपलब्ध करवाना।





