Parliamentry Committee Proposal:विपक्षी दलों की चिंताओं के बीच संसद की संसदीय समिति ने एक सिफारिश की है। सिफारिश के तहत अगर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री किसी अपराध के आरोप में 30 दिन जेल में रहते हैं, तो उन्हें पद से हटाने की जगह निलंबित करना चाहिए।
संसदीय समिति ने एक ऐसा प्रस्ताव भी दिया है, जिसके तहत अगर ऐसे लोगों को आरोपों से बरी किया जाता है या केस की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ती है, तो निलंबन अपने आप खत्म हो जाएगा।
सीएम और पीएम को होना होगा निलंबित
दरअसल, 130वें संशोधन विधेयक की समीक्षा कर रही संसद की संयुक्त समिति ने 2 खास और 3 सामान्य सिफारिशे की हैं। अगस्त 2025 में पेश किए गए इस बिल में यह प्रावधान था कि अगर प्रधानमंत्री, मंत्री या मुख्यमंत्री 30 दिन तक हिरासत में रहने के बाद, अगर 31वें दिन खुद इस्तीफा नहीं देते हैं, ऐसे में उन्हें पदमुक्त माना जाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इस बिल का विरोध किया था। विपक्षी सांसदों ने इस बिल की समीक्षा करने वाली संयुक्त समिति से दूरी बना ली थी।
लोकसभा में पेश किया जा सकता है बिल
संसद की संयुक्त समिति ने यहा भी प्रस्ताव रखा है कि एक अलग अनूसूची होनी चाहिए, जिसमें 5 वर्ष या उससे ज्यादा की सजा वाले अपराध शामिल हों, ताकी उन अपराधों की पहचान हो सके, जिसकी वजह से निलंबन की प्रकिया शुरू की जा सकती है। ये बिल लाने का उद्देशय है कि है कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सराकरें जेल के अंदर से नहीं चलाई जा सकती हैं। यदि सिफारिशें को मान ली जाती है, तो गृह मंत्रालय प्रस्तावित संशोधनों के साथ कैबिनेट के पास जाएगा और लोकसभा में विधेयक पेश किया जाएगा।













