Parliament News: संसद के विशेष सत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। लोकसभा में शुक्रवार शाम बहुचर्चित महिला आरक्षण बिल (131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026) दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाने के कारण गिर गया है। वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पास कराने के लिए कम से कम 352 वोटों की आवश्यकता थी। इस बड़े झटके के बाद केंद्र सरकार को परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े दो अन्य बिल भी वापस लेने पड़े हैं।
वोटिंग का पूरा गणित: क्यों फेल हुआ महिला आरक्षण बिल?
चूंकि यह एक संविधान संशोधन बिल था, इसलिए नियमों के मुताबिक इसे लोकसभा में पास कराने के लिए सदन में मौजूद सांसदों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। शुक्रवार को हुई वोटिंग में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया।
बिल के पक्ष में वोट: 298
बिल के विरोध में वोट: 230
पास होने के लिए जरूरी वोट: 352 (कुल 528 का दो-तिहाई)
आंकड़ों के अनुसार, महिला आरक्षण बिल लोकसभा में 54 वोटों के अंतर से पास होने से रह गया। वोटिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को आधिकारिक तौर पर जानकारी दी कि 131वां संशोधन विधेयक सदन में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त न कर पाने के कारण पारित नहीं हो सका है।
21 घंटे की बहस और 130 सांसदों ने रखे विचार
इस अहम बिल पर गुरुवार को विशेष सत्र के पहले दिन देर रात तक चर्चा हुई थी। शुक्रवार को भी वोटिंग से पहले कई घंटों तक सदन में बहस चली। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिल पर लोकसभा में कुल 21 घंटे तक चर्चा हुई, जिसमें 130 सांसदों ने अपना पक्ष रखा। बोलने वाले सांसदों में 56 महिला सांसद भी शामिल थीं।
850 लोकसभा सीटें करने का था प्रस्ताव
इस 131वें संविधान संशोधन विधेयक 2026 के तहत महिला आरक्षण लागू करने के साथ ही देश में लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर 850 करने का अहम प्रस्ताव रखा गया था। इसमें राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) से 35 सीटें तय करने का फॉर्मूला शामिल था, जो अब बिल गिरने के साथ ही अटक गया है।
सरकार ने वापस लिए दो और अहम बिल
महिला आरक्षण बिल के फेल होने का असर संसद के बाकी कामकाज पर भी पड़ा है। इस बिल के सपोर्ट के लिए लाए गए दो अन्य विधायकों को सरकार ने वापस ले लिया है:
परिसीमन संशोधन विधेयक 2026: इस बिल के जरिए परिसीमन के लिए जनसंख्या की परिभाषा में बदलाव किया जाना था, ताकि 2011 की जनगणना को आधार बनाया जा सके।
केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026: यह बिल पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू कश्मीर के स्थानीय कानूनों में बदलाव के लिए लाया गया था, जिससे वहां भी परिसीमन और महिला आरक्षण को लागू किया जा सके।













