• About us
  • Contact us
Wednesday, July 15, 2026
31 °c
New Delhi
37 ° Wed
38 ° Thu
Kadwa Satya
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी
No Result
View All Result
Kadwa Satya
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
  • जीवन मंत्र
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • स्पेशल स्टोरी
Home संपादकीय

जीडीपी की विकास दर की कीमत कौन चुका रहा है?

News Desk by News Desk
July 14, 2026
in संपादकीय
जीडीपी की विकास दर की कीमत कौन चुका रहा है?
Share on FacebookShare on Twitter

अमित पांडे: संपादक

बहस तो इस बात पर भी है कि जीडीपी की विकास दर की कीमत कौन लोग चुका रहे हैं? ये वो लोग हैं जो अपने ही देश में हर प्रकार का संघर्ष सिर्फ इसलिए कर रहे हैं कि उनको भी इंसान मान लिया जाए, न सिर्फ इसलिए कि वो वोट देते हैं, बल्कि इसलिए भी कि वो अर्थशास्त्र की परिभाषा के हिसाब से तंत्र चलाने के लिए उतना ही आवश्यक हैं जितना कि उनके कॉरपोरेट्स। फर्क सिर्फ इतना है कि उनको नियमों के लिए जीना पड़ता है, और उनके लिए नियम बलिदान किए जाते हैं।


भारत में आर्थिक विषमता लगातार बढ़ती जा रही है। यह खाई इतनी चौड़ी हो चुकी है कि इसे पाटना अब लगभग नामुमकिन हो चुका है। परिणामस्वरूप, भारत की रीढ़ कहा जाने वाला मध्यवर्ग हताशा का शिकार है। गौरतलब है कि एचएनआई (हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल) उन लोगों को माना जाता है जिनके पास अपनी तमाम देनदारियों के बाद 10 लाख डॉलर, यानी लगभग 9.5 करोड़ रुपया या उससे अधिक मूल्य की कोई ऐसी संपत्ति हो जिसे जब चाहें नकदी में बदला जा सके। भारत में ऐसी स्थिति सिर्फ और सिर्फ धातुओं की है, जिनमें सोना, चांदी, हीरा और भी शामिल हैं। पर सवाल उठता है कि कितने प्रतिशत लोग, या भारत की कितनी बड़ी आबादी, इस किस्म की हैसियत रखती है।


आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस साल उनके प्रतिशत में भारी गिरावट आई है — जहां 2021 से 2023 के बीच यह प्रतिशत 9.5 था, वहीं उसके बाद सिर्फ 6.5 प्रतिशत रह गया है। यह करिश्मा तब है जब सरकार खुले तौर पर हर प्रकार की आजादी दे रखी है। मजदूरों को बंधुआ मजदूर बनाकर काम कराने से लेकर बाजार व्यवस्था को ठीक करने के नाम पर हर प्रकार का सरकारी गबन व लूट होने के बावजूद, इस प्रकार का नतीजा शंका पैदा करने वाला है — क्या सचमुच हम इतने पीछे जा रहे हैं, और जिम्मेदारों को सिर्फ जुमलेबाजी याद रहती है?


यह सोचने की बात है कि हमने अपने हर प्रकार के आत्यंतिक खर्च की कटौती करके उद्योगपतियों को हर प्रकार की रियायतें दीं, खुली लूट भी करने दी, नियामक संस्थाओं को चुप करा दिया — इसके बावजूद हमारी प्रगति, जो सामूहिक तौर पर 2014 के बाद थी ही नहीं, व्यक्तिगत स्तर पर भी टिक नहीं रही। इन कारणों की पड़ताल करने की जरूरत है — कहीं ऐसा तो नहीं कि जिनको देश के नाम पर जिस लूट की आजादी दी गई, वो अपना भला भी नहीं कर पा रहे?


पिछले कुछ दिनों से मध्य एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया के शेयर बाजार धड़ाम हो गए, भारत के बाजार की हालत भी ठीक नहीं रही। विदेशी निवेशक और बड़े पूंजीपति जोखिम लेने से बचते रहे, पर मध्यवर्ग और निम्न-मध्य वर्ग ने बाजार में आस्था दिखाते हुए बाजार को संभाले रखा। बाजार में जो कुछ भी रौनक या काम-चलाऊ स्थिति दिख रही है, वह उन्हीं छोटे निवेशकों की बदौलत है जिनका एकमात्र आसरा और आस्था बाजार है। मजेदार यह है कि अब सरकार भी यह जान गई है कि विदेशी निवेशक और बड़े घराने इस समय निवेश नहीं करेंगे, लेकिन जो निवेश कर रहे हैं उन्हें राहत देने के बजाय ऐसे नियमों का दौर जारी किया गया जो सोचने पर मजबूर करता है कि हमें बाजार और निवेश रखना है या बंद कर देना है।


चुनाव का असली मुद्दा सिर्फ और सिर्फ राजनीति का होता है — आम लोगों में इसका प्रभाव सिर्फ वोट देने और पार्टी को जिताने तक सीमित रहता है। लेकिन एसआईआर के बाबत यह कहना कि जिसका नाम इस लिस्ट में नहीं, उसकी नागरिकता ही चुनौती में है, आश्चर्य की हर पराकाष्ठा को पार कर जाता है। माना कि बहुतों का नाम इस जगलरी में काट दिया गया होगा। जब माननीय अदालत यह कह रही है कि वोट अगली बार दे लेना, तो ऐसे नियमों का क्या औचित्य है? पर सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं — उसे बस इस बात से फर्क पड़ता है कि बाजार की स्थिरता देश के सम्मान और प्रभुत्वसंपन्न होने की निशानी है।


मुझे याद है कि महज आज से 20-30 साल पहले तक कोई भी पाकिस्तान से बड़ी डील खरीद या बेच नहीं करता था; पैसे देने पर भी कोई दूसरा देश उससे व्यापार नहीं करता था। यह हल्ला था कि यह बैंकरप्ट देश है और दान पर काम चलाता है। पाकिस्तान ने हालात की नजाकत को समझा, विदेश नीति पर मेहनत की, और चीन व अमेरिका — दोनों से ही लाभ लेने लगा। आज जो अमेरिका भारत को हाई-वैल्यू लोन देता है, वही पाकिस्तान को डोनेशन देता है, उसकी आर्थिक गतिविधियां बढ़ाता है और हालात ठीक करने की दिशा में काम करता है। भारत की नीति अभी तक समझ में आने लायक नहीं लगी — आखिर अपने ही लोगों में अफरा-तफरी करके हम क्या हासिल कर पाएंगे?


अक्सर यह कहा जाता है कि भारत को अगर ग्रोथ करनी है तो युवा शक्ति को काम के लिए प्रोत्साहित करना होगा और जिम्मेदार बनाना होगा। हालांकि भारत का युवा मंदिर बनाने के लिए चंदा जुटाने, गोरक्षा समिति का सदस्य होने, सेल्फी लेने और जुगाड़ करने में माहिर हो चुका है। पूरा सोशल मीडिया उनके क्रांतिकारी नारों से पटा पड़ा मिलेगा — फिर उसे कहां समय है कि इन बातों पर सोचे। सोच विकसित करने तक ले जाने वाले जिस वैज्ञानिक माहौल की जरूरत थी, वह अब भक्ति भाव में निष्काम जीवन बिताने के संकल्प में बदल चुका है। हालांकि सरकारी एजेंसियां यह भी कह रही हैं कि जितने भी बड़े मंदिर हैं, वहां चढ़ावे में चोरी-डकैती लंबे समय से चल रही है — उत्तराखंड के बीकेटीसी में चोर पकड़ा गया है और घपले में कुछ सरकारी लोग भी शामिल हैं। इससे इंकार करना मुश्किल है, पर सरकार है, वो इसे भी संभाल ही लेगी — जैसे अब तक के घपलों को संभालती आई है।


सवाल बड़ा मौलिक है — अगर हम समस्या जान गए हैं तो समाधान की कोशिश क्यों नहीं करते? जवाब अभी तक नहीं है कि जिन हाथों को काम मिल जाना था, जिन्हें उत्साहित करना था, वो गोरक्षक बनकर क्या कर रहे हैं, जबकि सरकार कह रही है कि बीफ निर्यात में हम दुनिया के अग्रणी देशों में हैं। जरूरत इस बात की है कि लोग अपने नेतृत्व पर यकीन करें, बलवाई होने और जुगाड़ू होने पर नहीं। यह आश्चर्य नहीं कि दुनिया के देश बड़े संकट से ग्रस्त हैं — एआई के बाद नौकरी को खतरा उन लोगों के लिए है जो दक्ष हैं, हमारे यहां तो इसकी परंपरा ही नहीं डाली गई। बेरोजगारी चरम पर है, कितने दिन सरकार अपने राशन के बहाने इसे पालती रहेगी, और अंत में एक अंतहीन मुकाबला शुरू होगा — बेहतर है कि प्रयास अभी से हो। आर्थिक असमानता का बढ़ना सिर्फ राष्ट्र के लिए नहीं, समाज और संस्कृति के लिए भी घातक है।

Tags: Business NewsEconomic Analysiseconomic growthEconomic InequalityEditorialFiscal PolicyGDP GrowthIncome InequalityIndia EconomyIndia GDP AnalysisIndian economyMiddle ClassopinionRetail InvestorsStock MarketUnemploymentWealth Gap
Previous Post

“डूबता जहाज” या डूबती साख? दिल्ली उच्च न्यायालय ने WAPCOS द्वारा शपथ पर किए गए निराधार दावों पर लगाई फटकार

Next Post

Kal Ka Mausam 15 July: IMD ने यूपी, बिहार, ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया, दिल्ली में भी बारिश के आसार

Related Posts

जीडीपी की विकास दर की कीमत कौन चुका रहा है?
संपादकीय

जीडीपी की विकास दर की कीमत कौन चुका रहा है?

July 13, 2026
मनीष सिसोदिया ने श्री गुरु रविदास जी की शिक्षाओं पर चलने के लिए युवाओं को सामाजिक और आर्थिक असमानता खत्म करने का दिया न्यौता
देश

मनीष सिसोदिया ने श्री गुरु रविदास जी की शिक्षाओं पर चलने के लिए युवाओं को सामाजिक और आर्थिक असमानता खत्म करने का दिया न्यौता

May 18, 2026
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब को सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य बनाने के लिए औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति–2026 की शुरुआत
देश

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब को सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य बनाने के लिए औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति–2026 की शुरुआत

March 7, 2026
मान सरकार का ‘महिला उद्यमी सम्मान कार्यक्रम’ महिला सशक्तिकरण के लिए एक अनोखी पहल
देश

मान सरकार का ‘महिला उद्यमी सम्मान कार्यक्रम’ महिला सशक्तिकरण के लिए एक अनोखी पहल

March 6, 2026
रूसी तेल पर अमेरिकी रहम: भारत की गरिमा कहाँ?
संपादकीय

रूसी तेल पर अमेरिकी रहम: भारत की गरिमा कहाँ?

March 6, 2026
विश्व हिन्दी दिवस पर विशेष: संस्कृत नहीं, हिंग्लिश होगी सन् 2047 में विकसित भारत की जनभाषा !
स्पेशल स्टोरी

विश्व हिन्दी दिवस पर विशेष: संस्कृत नहीं, हिंग्लिश होगी सन् 2047 में विकसित भारत की जनभाषा !

January 10, 2026
Next Post
Kal Ka Mausam 15 July: IMD ने यूपी, बिहार, ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया, दिल्ली में भी बारिश के आसार

Kal Ka Mausam 15 July: IMD ने यूपी, बिहार, ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया, दिल्ली में भी बारिश के आसार

Please login to join discussion
New Delhi, India
Wednesday, July 15, 2026
Moderate or heavy rain with thunder
31 ° c
66%
7.2mh
40 c 33 c
Wed
42 c 34 c
Thu

ताजा खबर

Nitin Gadkari Flying Bus: यूपी वालों को गडकरी का बड़ा सरप्राइज, सड़क नहीं अब ‘हवा’ में उड़ेगी बस; वीडियो हुआ वायरल।

Nitin Gadkari Flying Bus: यूपी वालों को गडकरी का बड़ा सरप्राइज, सड़क नहीं अब ‘हवा’ में उड़ेगी बस; वीडियो हुआ वायरल।

July 14, 2026
Viral Trend: कैब और खाने की तरह अब रेंट पर बुक करें ‘बॉयफ्रेंड’, भारत में वायरल हुआ जापान का यह अनोखा कॉन्सेप्ट।

Viral Trend: कैब और खाने की तरह अब रेंट पर बुक करें ‘बॉयफ्रेंड’, भारत में वायरल हुआ जापान का यह अनोखा कॉन्सेप्ट।

July 14, 2026
समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ठोका 3 लाख का जुर्माना; जानें क्यों लिया गया ये एक्शन

समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ठोका 3 लाख का जुर्माना; जानें क्यों लिया गया ये एक्शन

July 14, 2026
Kal Ka Mausam 15 July: IMD ने यूपी, बिहार, ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया, दिल्ली में भी बारिश के आसार

Kal Ka Mausam 15 July: IMD ने यूपी, बिहार, ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया, दिल्ली में भी बारिश के आसार

July 14, 2026
जीडीपी की विकास दर की कीमत कौन चुका रहा है?

जीडीपी की विकास दर की कीमत कौन चुका रहा है?

July 14, 2026

Categories

  • अपराध
  • अभी-अभी
  • करियर – शिक्षा
  • खेल
  • गीत संगीत
  • जीवन मंत्र
  • टेक्नोलॉजी
  • देश
  • बॉलीवुड
  • भोजपुरी
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • रोजगार
  • विदेश
  • व्यापार
  • व्रत त्योहार
  • शिक्षा
  • संपादकीय
  • स्पेशल स्टोरी
  • स्वास्थ्य
  • About us
  • Contact us

@ 2025 All Rights Reserved

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • खेल
  • अपराध
  • करियर – शिक्षा
    • टेक्नोलॉजी
    • रोजगार
    • शिक्षा
  • जीवन मंत्र
    • व्रत त्योहार
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
    • बॉलीवुड
    • गीत संगीत
    • भोजपुरी
  • स्पेशल स्टोरी

@ 2025 All Rights Reserved