लखीसराय: फरक्का जल संधि के खिलाफ JDU ने छेड़ा अभियान, कहा- बिहार के हितों से समझौता नहीं
JDU ने लखीसराय में फरक्का जल संधि के तीसरे चरण का आगाज़ किया। पार्टी का दावा है कि यह संधि बिहार के हितों के खिलाफ है।

बिहार में पानी के हक की लड़ाई अब और तेज होने वाली है। जनता दल (यूनाइटेड) ने सोमवार को लखीसराय के आरके मैदान स्थित टाउन हॉल में 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' कार्यक्रम के तीसरे चरण का औपचारिक आगाज किया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आम जनता को यह समझाना है कि 1996 की फरक्का जल संधि किस तरह बिहार के जल अधिकारों और राज्य के भविष्य पर नकारात्मक असर डाल रही है।
कार्यक्रम के दौरान JDU के राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कड़े शब्दों में कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि बिहार के हितों के पूरी तरह विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संधि के नवीनीकरण को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। झा ने तर्क दिया कि भविष्य में कोई भी नया समझौता तभी होना चाहिए जब उसमें साल 2050 तक बिहार की अनुमानित पानी की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने बताया कि सूखे के मौसम में गंगा और अन्य आंतरिक नदियों का पानी बांग्लादेश की ओर मोड़ दिया जाता है, जिससे बिहार के किसानों की सिंचाई, पीने के पानी और औद्योगिक जरूरतों पर बुरा असर पड़ता है।
बाढ़ और सूखे की दोहरी मार झेल रहा है बिहार
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बिहार इस संधि और फरक्का बैराज की वजह से दोहरी मार झेल रहा है। उन्होंने समझाया कि बैराज के कारण नदी के तल में गाद (silt) जमा हो गई है, जिससे नदी का स्तर ऊपर उठ गया है और राज्य को हर साल भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर, संधि की शर्तों के कारण बिहार को उसका वाजिब हक नहीं मिल पाता, जिससे कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। कुशवाहा के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय संधि का करीब 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है।
इस मौके पर विधायक रामानंद मंडल ने जोर देकर कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि बिहार के अधिकारों और जनहित की लड़ाई है। जिला अध्यक्ष रामानुज शर्मा ने भी केंद्र सरकार तक बिहार की इन चिंताओं को पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में नगर परिषद अध्यक्ष अरविंद पासवान सहित कई ब्लॉक अध्यक्ष और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। लोगों को जागरूक करने के लिए एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई और पंपलेट्स भी बांटे गए।
गौरतलब है कि इस अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई थी। पहले चरण में बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय और खगड़िया को कवर किया गया, जबकि दूसरे चरण में सारण, वैशाली, समस्तीपुर और पटना में कार्यक्रम हुए। लखीसराय के बाद अब यह मुहिम मुंगेर, भागलपुर और कटिहार तक जाएगी, जिसका समापन 4 नवंबर को कटिहार में होगा।