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दिल्ली में CAPF की भारी तैनाती पर सवाल, पूर्व नौकरशाह ने हाई कोर्ट में दाखिल की याचिका

पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए CAPF की लंबी तैनाती के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में PIL दाखिल की है।

Sonu Nigam· 31 Oct, 7:42 AM · 2 मिनट
दिल्ली में CAPF की भारी तैनाती पर सवाल, पूर्व नौकरशाह ने हाई कोर्ट में दाखिल की याचिका

देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की जिस तरह से लंबी और व्यापक तैनाती की गई है, अब उसे कानूनी चुनौती दी गई है। पूर्व सिविल सेवक आशीष जोशी ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर इस पूरी प्रक्रिया और इसके संवैधानिक आधार पर सवाल उठाए हैं।

अधिवक्ता अंबुज दीक्षित और अमरीश रंजन पांडे के माध्यम से 30 अक्टूबर 2026 को दायर इस याचिका में कहा गया है कि प्रशासन ने पहले 301 CAPF कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी थी। इसके बाद 273 कंपनियों के कार्यकाल को 31 अक्टूबर 2026 तक और फिर 270 कंपनियों को 16 नवंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया। याचिकाकर्ता का तर्क है कि नागरिक शक्ति की सहायता के लिए बलों की तैनाती का मतलब यह कतई नहीं है कि शांतिपूर्ण सभाओं को तितर-बितर किया जाए या प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाए।

सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों पर उठाए गंभीर सवाल

इस याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का हवाला देते हुए यह दलील दी गई है कि इस तरह की तैनाती से नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हो सकता है। आशीष जोशी ने अदालत से मांग की है कि गृह मंत्रालय (MHA) और दिल्ली पुलिस को उन सभी आधिकारिक दस्तावेजों और मंजूरी आदेशों को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया जाए, जो 6, 8, 22 और 29 अक्टूबर को जारी किए गए थे।

याचिका में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उठाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • तैनात किए गए कुल बलों और वास्तव में विरोध प्रदर्शनों में लगे जवानों की संख्या का विस्तृत विवरण दिया जाए।
  • यह स्पष्ट किया जाए कि राजधानी में इतनी बड़ी संख्या में बलों की तैनाती से सीमा सुरक्षा, चुनाव की तैयारियों और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर क्या असर पड़ा है।
  • उन जोखिम आकलन (Risk Assessment) रिपोर्टों को पेश किया जाए, जिनके आधार पर यह माना गया कि इतनी बड़ी तैनाती जरूरी थी।
  • क्या प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और हिंसा फैलाने वालों के बीच अंतर करने के लिए किसी अन्य विकल्प पर विचार किया था?

याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि 16 नवंबर 2026 के बाद CAPF की तैनाती के किसी भी विस्तार पर तब तक रोक लगाई जाए, जब तक कि सरकार वर्तमान आवश्यकता का लिखित और तर्कसंगत कारण पेश न करे। गौरतलब है कि जून 2026 से दिल्ली के मध्य इलाकों में कॉकरोच जनता पार्टी, विभिन्न विपक्षी दलों और छात्र संगठनों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जिसके कारण सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है।

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