दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: X ने माना पुलिस के नाम से भेजे गए टेकडाउन नोटिस थे फर्जी
दिल्ली हाईकोर्ट ने IFF और SFLC की याचिकाएं खारिज कीं, X ने माना कि पुलिस के नाम से भेजे गए टेकडाउन नोटिस फर्जी थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक दिलचस्प मामले में इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) और सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर (SFLC) द्वारा दायर याचिकाओं को निस्तारित कर दिया है। यह फैसला तब आया जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने अदालत के सामने यह स्वीकार किया कि याचिकाकर्ताओं को भेजे गए कंटेंट हटाने (takedown) के नोटिस वास्तव में फर्जी थे। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की, जिसमें यह खुलासा हुआ कि इन नोटिसों का दिल्ली पुलिस से कोई लेना-देना नहीं था।
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब IFF और SFLC ने अदालत में चुनौती दी कि उनके अकाउंट्स, जिनमें @geoblockedindia भी शामिल था, और कुछ खास पोस्ट्स को हटाने के लिए नोटिस भेजे गए थे। इन नोटिसों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि का हवाला दिया गया था और यह दावा किया गया था कि कंटेंट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि यह उनके अभिव्यक्ति की आजादी (अनुच्छेद 19(1)(a)) का उल्लंघन है।
फर्जी ईमेल और गलत जानकारी से खुला राज
अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने बताया कि इन नोटिसों में कई गंभीर खामियां थीं। याचिकाकर्ताओं ने गौर किया कि नोटिस में दिए गए ईमेल पते अस्तित्व में ही नहीं थे और संपर्क विवरण दिल्ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट से मेल नहीं खा रहे थे। सबसे बड़ी बात यह थी कि इन नोटिसों के पीछे कोई वैध अदालती आदेश नहीं था।
जब कोर्ट ने X से इस पर जवाब मांगा, तो प्लेटफॉर्म ने अपनी आंतरिक जांच के बाद पुष्टि की कि ये नोटिस किसी 'इम्पोस्टर' यानी बहरूपिये द्वारा भेजे गए थे, जिसने पुलिस का रूप धारण किया था। X ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इन अवैध अनुरोधों के आधार पर IFF और SFLC के अकाउंट्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
X ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है ताकि उस व्यक्ति की पहचान की जा सके जिसने पुलिस के नाम का गलत इस्तेमाल कर इन फर्जी नोटिसों को भेजा था। इस स्पष्टीकरण के बाद अदालत ने याचिकाओं को समाप्त कर दिया।