पंजाब

पंजाब PCS मुख्य परीक्षा परिणामों में धांधली का आरोप, तरुण चुघ ने मांगी CBI जांच

बीजेपी नेता तरुण चुघ ने पंजाब पीसीएस मुख्य परीक्षा परिणामों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए राज्यपाल से CBI जांच की मांग की है।

Sonu Nigam· 5 Nov, 10:00 PM · 2 मिनट
पंजाब PCS मुख्य परीक्षा परिणामों में धांधली का आरोप, तरुण चुघ ने मांगी CBI जांच

पंजाब में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद तरुण चुघ ने पंजाब लोक सेवा आयोग (PPSC) द्वारा घोषित पीसीएस मुख्य परीक्षा 2026 के परिणामों में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। चुघ ने इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने के लिए पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखा है और मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच एजेंसी CBI से कराई जाए।

तरुण चुघ का दावा है कि पंजाब का युवा इस समय एक गहरे संकट से गुजर रहा है और सरकारी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। उन्होंने पत्र में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार होने वाले पेपर लीक और चयन प्रक्रियाओं में गड़बड़ी ने पूरे सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चयन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

बीजेपी नेता ने परिणामों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों में से लगभग 24.21 प्रतिशत लोग केवल एक ही परीक्षा केंद्र से हैं, जो बेहद संदिग्ध है। इसके अलावा, उन्होंने चयन के मानदंडों पर भी सवाल उठाए। चुघ ने पूछा कि जब पद 331 थे, तो इंटरव्यू के लिए 751 उम्मीदवारों को क्यों बुलाया गया, जबकि नियम के मुताबिक विज्ञापित पदों से तीन गुना उम्मीदवारों को ही बुलाया जाना चाहिए।

चुघ ने केवल पीसीएस ही नहीं, बल्कि अन्य परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि PSSSB ग्रुप-बी परीक्षा में भी गड़बड़ी हुई, जहां टॉप 100 में से 22 उम्मीदवार बठिंडा जिले के थे। उन्होंने फार्मेसी ऑफिसर भर्ती में पेन कैमरा और ब्लूटूथ जैसे हाई-टेक उपकरणों के इस्तेमाल और चीटिंग नेटवर्क का भी आरोप लगाया।

तरुण चुघ ने राज्यपाल से मांग की है कि:

  • पीसीएस मुख्य परीक्षा परिणामों की तुरंत CBI जांच कराई जाए।
  • जांच पूरी होने तक इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
  • उत्तर पुस्तिकाओं, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित किया जाए।
  • पूरी प्रक्रिया का फॉरेंसिक और सांख्यिकीय ऑडिट कराया जाए।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि राज्य स्तर की जांच में राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना हो सकती है, इसलिए भगवंत मान सरकार को इस जांच और प्रशासनिक फैसलों से दूर रखा जाए ताकि पंजाब के गरीब किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं को न्याय मिल सके।

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