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दिल्ली में 8 साल बाद अक्टूबर की हवा हुई इतनी साफ, AQI में आई बड़ी गिरावट

दिल्ली ने अक्टूबर महीने में 8 साल का सबसे कम औसत AQI रिकॉर्ड किया है। जानिए मौसम और सरकारी सख्ती का इस पर क्या असर रहा।

Sonu Nigam· 1 Nov, 9:34 AM · 2 मिनट
दिल्ली में 8 साल बाद अक्टूबर की हवा हुई इतनी साफ, AQI में आई बड़ी गिरावट

देश की राजधानी दिल्ली के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अक्टूबर के महीने में दिल्ली की हवा पिछले आठ सालों में सबसे ज्यादा साफ रही है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 166 दर्ज किया गया, जो पिछले आठ वर्षों के किसी भी अक्टूबर महीने की तुलना में सबसे कम है।

अगर पिछले सालों पर नजर डालें तो हवा की स्थिति काफी खराब रही थी। साल 2018 में औसत AQI 269 था, जबकि 2020 में यह 265 तक पहुंच गया था। पिछले साल 2025 में भी यह आंकड़ा 223 था। ऐसे में इस बार का 166 का औसत एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि 30 अक्टूबर को AQI गिरकर 60 तक पहुंच गया था, जो पिछले चार सालों के अक्टूबर महीने का सबसे स्वच्छ दिन था।

बारिश और मौसम ने बदली हवा की चाल

विशेषज्ञों का मानना है कि हवा में इस सुधार के पीछे मुख्य कारण कुदरत का साथ मिलना रहा है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषण के अनुसार, अक्टूबर के महीने में हुई बेमौसम भारी बारिश ने प्रदूषकों को जमीन पर बैठने नहीं दिया और हवा को साफ करने में मदद की। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी इस असामान्य मौसम की पुष्टि की है, जिसमें 1951 के बाद अक्टूबर का सबसे ठंडा दिन भी दर्ज किया गया।

इतना ही नहीं, जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच दिल्ली में 220 दिन 'अच्छी से मध्यम' श्रेणी में रहे, जो 2020 को छोड़कर 2018 के बाद सबसे अधिक हैं। हालांकि, राहत की इस खबर के बीच चेतावनी भी जारी की गई है। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के मुताबिक, जैसे-जैसे मौसम बदलेगा, हवा की गुणवत्ता फिर से 'खराब' या 'बहुत खराब' श्रेणी में जा सकती है।

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने अपना विंटर एक्शन प्लान पूरी सख्ती से लागू कर दिया है। इसके तहत पुराने और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर पाबंदी लगाई गई है और ई-चालान की कार्रवाई तेज कर दी गई है, ताकि सर्दियों की शुरुआत में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखा जा सके।

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