चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर से वोट छीनने का आरोप, AISA की नेहा बोरा ने खोला मोर्चा
AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर और SIR प्रक्रिया के जरिए करोड़ों मतदाताओं को हटाने का गंभीर आरोप लगाया है।

देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सॉफ्टवेयर की आड़ में आम नागरिकों के मतदान के अधिकार को छीना जा रहा है। एक मॉक पार्लियामेंट सत्र के दौरान उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया के नाम पर ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर रहा है।
यह पूरा विवाद चुनावी सूचियों के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटा दिए गए हैं। नेहा बोरा और अन्य प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि SIR में इस्तेमाल किए जा रहे एल्गोरिदम और दस्तावेजों की सख्त शर्तों का मकसद गरीब, हाशिए पर रहने वाले और प्रवासी लोगों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करना है।
रामलीला मैदान में मेगा रैली और मुख्य मांगें
इस मुद्दे को लेकर नेहा बोरा ने इंडिया (INDIA) गठबंधन द्वारा 1 नवंबर, 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली मेगा रैली को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने गठबंधन की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा हो।
- वर्तमान में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के काम को तुरंत रोका जाए।
- साल 2023 के बाद से लागू किए गए सभी चुनावी कानूनों और नियमों को वापस लिया जाए।
इस आंदोलन में युवाओं की पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ-साथ राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्षी दल भी शामिल हैं।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि ये दावे केवल राजनीतिक लाभ के लिए किए जा रहे हैं और वोटर लिस्ट का रिविजन एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है जो समय-समय पर जरूरी होती है। वहीं, चुनाव आयोग ने भी अपनी सफाई देते हुए कहा है कि चुनावी सूचियों को सटीक बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य है और इसमें किसी भी तरह का पक्षपात नहीं किया गया है।