दिल्ली यूनिवर्सिटी में 'साइबर सतर्कता 1.0' का आयोजन, छात्रों को सिखाए डिजिटल सुरक्षा के गुर
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 'साइबर सतर्कता 1.0' के जरिए छात्रों को ऑनलाइन फ्रॉड और फिशिंग जैसे खतरों से बचने के तरीके बताए।

आज के दौर में जहां हमारी पूरी जिंदगी स्मार्टफोन और इंटरनेट पर सिमट गई है, वहीं साइबर अपराधों का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। ऐसे में छात्रों और युवाओं को डिजिटल दुनिया के खतरों से आगाह करने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने एक खास पहल की है। यूनिवर्सिटी ने 'साइबर सतर्कता 1.0' कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों और यूनिवर्सिटी समुदाय के बीच साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के लिए प्रेरित करना था।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का संचालन दिल्ली यूनिवर्सिटी कंप्यूटर सेंटर (DUCC) और फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा किया गया। इवेंट के दौरान न केवल विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी, बल्कि छात्रों की प्रतिभा को भी मंच मिला। साइबर सुरक्षा प्रोजेक्ट प्रदर्शनी और क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें नवाचार और बेहतरीन ज्ञान दिखाने वाले विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
करोड़ों लोगों तक पहुँचाया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान DUCC के डायरेक्टर प्रोफेसर संजीव सिंह ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी की 'साइबर सूचक' पहल के तहत अब तक करीब 1.65 करोड़ साइबर क्राइम जागरूकता ईमेल भेजे जा चुके हैं। इस व्यापक अभियान का मकसद आम जनता को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, पहचान की चोरी (Identity Theft) और इंटरनेट पर उभरते नए खतरों के प्रति सचेत करना है।
इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों के सत्र और इंटरैक्टिव चर्चाओं ने छात्रों की शंकाओं को दूर किया। समापन समारोह में कई दिग्गज हस्तियां शामिल हुईं, जिनमें यूनिवर्सिटी के मुख्य सतर्कता अधिकारी प्रोफेसर गजेंद्र सिंह, डीयूसीसी डायरेक्टर प्रोफेसर संजीव सिंह, जॉइंट रजिस्ट्रार डॉ. प्रदीप कुमार और डॉ. रोहन राय शामिल थे। इसके अलावा, गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के डिप्टी कमांडेंट ललित वशिष्ठ, दिल्ली पुलिस के एसीपी मनोज कुमार और CERT-In के डिप्टी डायरेक्टर कपिल वानखेड़े ने भी शिरकत की।
मेहमानों ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल युग में 'साइबर हाइजीन' यानी इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग करना उतना ही जरूरी है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य। उन्होंने जोर दिया कि जब युवा जागरूक होंगे, तभी समाज को साइबर अपराधियों से बचाया जा सकेगा।