नयी दिल्ली 09 अक्टूबर (कड़वा सत्य) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आयुर्वेद उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निर्मित करने का आह्वान करते हुए कहा है कि इसके लिए अनुसंधान और वैज्ञानिक परीक्षण पर जोर दिया जाना चाहिए।
श्रीमती मुर्मु ने राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के सातवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आयुर्वेदिक उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होने चाहिए जिससे उनका निर्यात बिना किसी बाधा के किया जा सके। इससे आयुर्वेद के ज्ञान के भंडार को सुबूत आधारित और वैज्ञानिक पद्धति के साथ विश्व-स्तर पर मान्यता दिलायी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की प्रासंगिकता बनी रहे, इसके लिए अनुसंधान में निवेश, औषधियों की गुणवत्ता में लगातार सुधार तथा आयुर्वेद के अध्ययन से जुड़े शिक्षा संस्थानों के सशक्तीकरण पर ध्यान देना होगा।उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में आयुर्वेद की मांग और मान्यता बढ़ रही है। स्वस्थ होने के लिए मन और शरीर दोनों का ही स्वस्थ होना आवश्यक है। आयुर्वेद और योग के बारे में जानने की इच्छा दुनियाभर के लोगों को भारत की ओर खींच रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं के मुख्य स्रोत जड़ी-बूटी और वनस्पति होते हैं। इसलिए आयुर्वेद का विकास न केवल मनुष्य के लिए बल्कि जीव-जंतुओं और पर्यावरण के लिए भी हितकारी होगा। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के प्रति हमारा पीढ़ी दर पीढ़ी का अटूट विश्वास है। इसी विश्वास का लाभ उठा कर कुछ लोग भोली-भाली जनता का नुकसान करते हैं।
सत्या.साहू
कड़वा सत्य
आयुर्वेद उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निर्मित करने का आह्वान किया मुर्मु ने


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