नयी दिल्ली, 22 जनवरी (कड़वा सत्य) राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत की जाने वाली झांकी में देश की सांस्कृतिक विविधता, रचनात्मकता और समृद्ध धरोहर का भव्य प्रदर्शन दिखेगा।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह झांकी प्रधानमंत्री के 'विरासत भी, विकास भी' मंत्र से प्रेरित है। झांकी भारत के विकसित राष्ट्र बनने के विजन-2047 में संस्कृति और नवाचार के योगदान को उजागर करती है।
झांकी के मुख्य आकर्षणों में कुम्हार के चाक पर याढ़, काइनैटिक कल्पवृक्ष और डिजिटल स्क्रीन शामिल हैं।
संस्कृति मंत्रालय के सचिव अरुणीश चावला ने बुधवार को यहां इस झांकी के विषय में कहा, “संस्कृति मंत्रालय की यह झांकी हमारे देश की अद्वितीय सांस्कृतिक विविधता, रचनात्मकता और सतत विकास की झलक है। यह झांकी न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देती है, बल्कि देश के हर नागरिक को एक उज्ज्वल भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। कुम्हार के चाक पर प्राचीन तमिल वाद्य यंत्र याढ़ हमारी परंपरा की गहराई और निरंतरता का प्रतीक है। वहीं, काइनैटिक कल्पवृक्ष जो ‘सोने की चिड़िया’ में बदलता है, हमारी रचनात्मकता और आर्थिक प्रगति का संदेश देता है।”
संस्कृति मंत्रालय की यह झांकी न केवल भारत के गौरवशाली अतीत को दर्शाती है, बल्कि एक सशक्त और रचनात्मक भविष्य का सपना भी दिखाती है। यह झांकी हर नागरिक को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का आमंत्रण देती है।
श्री चावला ने कहा कि इस झांकी का उद्देश्य, भारतीय संस्कृति, परंपराओं और रचनात्मकता को भव्य तरीके से प्रस्तुत करना है।
सैनी
कड़वा सत्य
गणतंत्र दिवस पर संस्कृति मंत्रालय की झांकी में दिखेगा विकसित राष्ट्र में संस्कृति, नवाचार का योगदान


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