नयी दिल्ली, 05 जनवरी (कड़वा सत्य) उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी को कथित नौकरी घोटाले के एक मामले में गिरफ्तारी के बावजूद राज्य मंत्रिमंडल में बने रहने के खिलाफ दायर एक याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि वह उच्च न्यायालय के फैसले से सहमत है और इसमें शीर्ष अदालत के किसी भी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं।
पीठ ने यह भी कहा कि राज्यपाल मुख्यमंत्री की सिफारिश के बिना किसी मंत्री को बर्खास्त नहीं कर सकते।
मद्रास उच्च न्यायालय ने पांच सितंबर 2023 को सामाजिक कार्यकर्ता एम एल रवि की याचिका खारिज कर दी थी, जिसे उन्होंने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।
बालाजी को प्रवर्तन निदेशालय ने 14 जून 2023 को गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
उच्च न्यायालय के फैसले में कहा गया था, "न तो संविधान और न ही 1951 का जन प्रतिनिधित्व अधिनियम किसी व्यक्ति को हिरासत में होने या आरोप तय होने के बाद मुकदमे के बाद राज्य विधान सभा का सदस्य बनने के लिए अयोग्य ठहराता है।"
शीर्ष अदालत के समक्ष दायार याचिका में दावा किया गया था कि उच्च न्यायालय का यह कहना उचित नहीं है कि हिरासत के दौरान मंत्री को हटाने के लिए कोई कानून नहीं है। याचिका में कहा गया है कि मिसाल के तौर पर अदालत को व्याख्या करनी होती है और कानून बनने तक शून्य को भरना होता है।
बीरेंद्र,आशा
तमिलनाडु के मंत्री बालाजी को हटाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज


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