नयी दिल्ली, 23 मार्च (कड़वा सत्य) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पंकज मित्तल ने कहा है कि धार्मिक हों या राष्ट्रीय मुद्दे , देश में उनका समाधान मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के जरिये
निकाला जाता रहा है।
न्यायमूर्ति मित्तल ने शनिवार को यहां महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (मेम्स) की ओर से आयोजित जस्टिस जे एस वर्मा मेमोरियल वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) प्रतियोगिता में कहा कि अब न्याय क्षेत्र में भारतीयता के अनुरूप बदलाव हो रहे हैं। आम जन को न्याय अब उनकी भाषा में सुलभ हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जो युवा एडीआर के क्षेत्र में अपनी सेवा देने का इरादा रखते हैं, उनके
लिये आने वाला समय बहुत बड़ा अवसर है, पर इसके लिये हमें बहुत ही समर्पित कानूनी पेशेवर चाहिये। उन्होंने मेम्स द्वारा आयोजित सात दिवसीय लॉ फेस्ट की सराहना की और कहा कि यहां युवाओं को लॉ क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर दिये जाते हैं।
उन्होंने न्यायालय में वकील और न्यायाधीश के बीच में संवाद पर कहा कि कई बार मामले की सुनवाई में ऐसा होता है कि वकील सीमा लांघ जाते हैं। इस पर उन्होंने वसीम बरेलवी
का शेर पढ़ते हुये कहा, “ कौन सी बात कब कैसे कही जाती है,
कहने का सलीका हो तो हर बात सुनी जाती है। ”
संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं महाराजा अग्रसेन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ नंद किशोर गर्ग ने कहा कि आज महाराजा अग्रसेन संस्थान के छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भागीदारी कर रहे हैं और जीत रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम वसुधैव कुटुंबकम् और सद्भाव के मंत्र पर चलते हुये पूरे विश्व को एक समान देखते हैं। हमारी आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत को आगे बढ़ायें इसके लिये हमारा संस्थान दृढ़ संकल्प है।
श्रवण.
कड़वा सत्य
देश में सभी मुद्दों का समाधान मध्यस्थता से निकाला जाता रहा है: न्यायमूर्ति मित्तल

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