बलिया: जिले के खोरीपाकड़ गांव में गंदे पानी की निकासी को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है. गांव के लोगों ने प्रशासन पर उनकी आपत्तियों की अनदेखी कर जबरन मंदिर परिसर और किसानों के खेतों की ओर गंदे पानी का बहाव मोड़ने का आरोप लगाया है. मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की है.

ग्रामीणों के अनुसार, खोरीपाकड़–माल्देपुर मुख्य मार्ग से अंदर स्थित मंदिर के सामने कई वर्षों से गंदे पानी का जलभराव बना हुआ है. इस समस्या के कारण करीब 15 से 20 बीघा कृषि भूमि प्रभावित हो चुकी है और खेती करना मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि पहले जिला प्रशासन ने मंदिर से माल्देपुर मोड़ तक सीवरेज नाला बनवाकर जल निकासी की व्यवस्था कराई थी, लेकिन निर्माण कार्य और रखरखाव ठीक से न होने के कारण नाला दोबारा जाम हो गया और समस्या फिर से खड़ी हो गई.

ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में ग्राम प्रधान ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन न तो नाले की प्रभावी सफाई कराई गई और न ही संबंधित कार्यदायी संस्था के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई. इससे गांव में जलभराव की स्थिति लगातार बनी हुई है.

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में सिटी मजिस्ट्रेट अन्य अधिकारियों और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. विरोध के बावजूद जेसीबी की मदद से गंदे पानी का बहाव सीवरेज नाले की ओर करने के बजाय मंदिर और किसानों के खेतों की दिशा में खोल दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि इससे धार्मिक स्थल और कृषि भूमि दोनों को नुकसान पहुंच रहा है. उन्होंने अधिकारियों पर अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया, जिससे लोगों में नाराजगी व्याप्त है.

मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए मंदिर और खेतों की ओर छोड़े गए पानी को तत्काल बंद कराने तथा सीवरेज नाले के माध्यम से स्थायी और सुचारु जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की अपील की है. फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.