मैहर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर निकाली गई तिरंगा यात्रा में देशभक्ति का जोश तो देखने को मिला, लेकिन इसी दौरान यातायात नियमों की जमकर अनदेखी भी सामने आई। यात्रा में शामिल सैकड़ों बाइक सवारों में बड़ी संख्या में युवा बिना हेलमेट के बाइक चलाते नजर आए।
सबसे बड़ा सवाल उस समय खड़ा हुआ जब मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी भी बिना हेलमेट के यात्रा में शामिल दिखाई दिए। वहीं मैहर भाजपा मंडल अध्यक्ष विकास तिवारी सहित यात्रा में शामिल कई बाइक सवारों ने भी हेलमेट नहीं लगाया था। तिरंगा हाथ में लेकर निकली इस यात्रा में यातायात नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आम नागरिकों से यातायात नियमों का पालन कराने और बिना हेलमेट वाहन चलाने पर कार्रवाई करने वाला यातायात विभाग क्या जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक आयोजनों में शामिल लोगों के लिए भी वही नियम लागू करता है? अगर नियम सभी के लिए समान हैं तो फिर तिरंगा यात्रा के दौरान सैकड़ों बाइक सवारों को बिना हेलमेट सड़क पर चलने की अनुमति कैसे मिली?
आम तौर पर गांवों और कस्बों से आने वाले गरीब और सामान्य नागरिकों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने तथा बिना हेलमेट वाहन चलाने पर चालानी कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों से अब सवाल है कि क्या यातायात नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं?
तिरंगा यात्रा देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, लेकिन देश के कानून और यातायात नियमों का सम्मान करना भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। ऐसे में जिले के यातायात प्रभारी और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि तिरंगा यात्रा के दौरान बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों पर क्या कार्रवाई की जाएगी? सवाल सीधा है—जब जनप्रतिनिधि ही यातायात नियमों को ठेंगा दिखाएंगे, तो आम नागरिकों को नियमों का पाठ कौन और किस नैतिक अधिकार से पढ़ाएगा?





