राष्ट्रीय एकता दिवस: नशामुक्त भारत और सांस्कृतिक संगम होगा मुख्य आकर्षण आएंगे 5000 प्रतिभागी

गुजरात के एकता नगर में इस साल राष्ट्रीय एकता दिवस का जश्न बेहद भव्य होने जा रहा है। सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में इस बार करीब 25,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और सरदार पटेल के देश के एकीकरण में दिए गए अतुलनीय योगदान को याद करना है।
इस साल के आयोजन की सबसे खास बात यह है कि देश के 126 वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित जिलों से लगभग 5,000 प्रतिभागियों को आमंत्रित किया गया है। गृह सचिव के अनुसार, इस पहल का मकसद अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों को एक साथ लाना, उनके बीच आपसी संवाद बढ़ाना और उन्हें गुजरात की संस्कृति से रूबरू कराना है, जिससे एकता की भावना और गहरी हो सके।
नशामुक्त भारत और सांस्कृतिक संगम होगा मुख्य आकर्षण
31 अक्टूबर को होने वाले इस समारोह में 'नशामुक्त भारत' एक प्रमुख थीम होगी। इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए एक विशाल मोटरसाइकिल रैली का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सभी 36 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के राइडर्स हिस्सा ले रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली से इस रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और पुलिस बलों से अपील की कि वे 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य पर काम करें।
कार्यक्रम को और अधिक समावेशी बनाने के लिए इस बार कई नए बदलाव किए गए हैं:
- ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: देशभर के लोग अब ऑनलाइन पंजीकरण के जरिए आवास बुक कर सकते हैं और कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं। अब तक 5 से 6 हजार लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
- सांस्कृतिक विविधता: कार्यक्रम में केरल के कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम जैसे नृत्य रूपों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की कलाकृतियों का प्रदर्शन होगा।
- भव्य झांकियां: कुल 15 झांकियां निकाली जाएंगी, जिनमें से 5 राष्ट्रीय विषयों पर आधारित होंगी और 10 गुजरात की संस्कृति को दर्शाएंगी।
गृह सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय एकता दिवस का उद्देश्य गणतंत्र दिवस से प्रतिस्पर्धा करना नहीं है, बल्कि दोनों का महत्व अलग है। जहाँ गणतंत्र दिवस संविधान और सैन्य शक्ति का प्रतीक है, वहीं राष्ट्रीय एकता दिवस पुलिस बलों की उपलब्धियों, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय अखंडता का उत्सव है।