नीदरलैंड के पहले गे प्रधानमंत्री बनने वाले हैं पिता, सरोगेसी से आएगा बच्चा... क्या बदल रही है परिवार की परिभाषा?

अमित पांडे: संपादक
नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन और उनके मंगेतर निकोलस कीनन 2027 में अपने पहले बच्चे का स्वागत करने वाले हैं। 19 अक्टूबर को दोनों ने इसकी घोषणा की। बच्चा सरोगेसी के जरिए जन्म लेगा, जिसमें एक महिला ने एग डोनेट किया है और दूसरी महिला गर्भधारण कर रही हैं। इस खबर के साथ 39 साल के जेटेन की जिंदगी में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है।
रॉब जेटेन नीदरलैंड के इतिहास में सबसे युवा और पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री हैं। फरवरी 2026 में सत्ता संभालने वाले जेटेन अब दूसरे विश्व युद्ध के बाद देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं, जिनके कार्यकाल के दौरान उनके घर बच्चे का जन्म होगा।
लेकिन इस खबर की अहमियत किसी प्रधानमंत्री की निजी जिंदगी तक सीमित नहीं है। यह परिवार, रिश्तों और माता-पिता बनने को लेकर समाज की उन परंपरागत धारणाओं पर भी सोचने का मौका देती है, जिन्हें लंबे समय से सामान्य मान लिया गया है।
क्या परिवार की पहचान सिर्फ मां और पिता से होती है?
दुनिया के ज्यादातर समाजों में परिवार की एक पारंपरिक तस्वीर रही है। एक पिता, एक मां और उनके बच्चे। यह व्यवस्था करोड़ों परिवारों की वास्तविकता है और इसका अपना सामाजिक महत्व भी है।
लेकिन क्या यही परिवार का एकमात्र स्वीकार्य रूप होना चाहिए?
यही वह सवाल है जो जेटेन और कीनन की कहानी से सामने आता है।
दो पुरुष साथ रहकर एक बच्चे की परवरिश करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने सरोगेसी का रास्ता चुना है। उनकी पार्टी D66 के मुताबिक, एग डोनर और सरोगेट मदर दोनों उनकी परिचित हैं और इस प्रक्रिया में कोई व्यावसायिक भुगतान नहीं किया गया है।
समलैंगिक जोड़े भी बच्चों की परवरिश कर सकते हैं, इस सवाल पर वैज्ञानिक रिसर्च मौजूद है। 2025 में प्रकाशित एक मेटा-एनालिसिस में 17 अध्ययनों के आधार पर समलैंगिक पुरुष अभिभावकों के साथ पल रहे बच्चों के मनोवैज्ञानिक विकास का आकलन किया गया। अध्ययन में ऐसा प्रमाण नहीं मिला कि ऐसे परिवार बच्चों के स्वस्थ मनोवैज्ञानिक विकास के लिए कम उपयुक्त हैं।
हालांकि, शोध की अपनी सीमाएं हैं और हर परिवार के भविष्य को किसी एक अध्ययन से नहीं समझा जा सकता।
लेकिन इससे एक महत्वपूर्ण तर्क ज़रूर निकलता है। किसी व्यक्ति की यौन पहचान को अपने आप उसकी पालन-पोषण की क्षमता का पैमाना मान लेना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।
बच्चे को सुरक्षित माहौल, भावनात्मक सहारा, शिक्षा और जिम्मेदार देखभाल मिले, इस पर कहीं ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
माता-पिता बनने का अधिकार और सरोगेसी की नैतिक चुनौती
इस कहानी का दूसरा पहलू सरोगेसी से जुड़ा है।
जेटेन और कीनन का पिता बनने का सपना दो महिलाओं की मदद से पूरा होने की उम्मीद है। इनमें एक एग डोनर हैं और दूसरी सरोगेट मदर, जिनकी पहचान लिसा के रूप में सार्वजनिक की गई है।
नीदरलैंड में कुछ शर्तों के साथ गैर-व्यावसायिक सरोगेसी की अनुमति है। सरोगेट महिला को गर्भावस्था से जुड़े खर्च की भरपाई की जा सकती है, लेकिन व्यावसायिक सरोगेसी को बढ़ावा देने पर कानूनी पाबंदियां हैं।
यहीं एक जरूरी बहस शुरू होती है।
माता-पिता बनने की इच्छा का सम्मान होना चाहिए, लेकिन क्या सिर्फ इच्छुक माता-पिता की खुशी ही इस प्रक्रिया की सफलता का आधार हो सकती है?
सरोगेट महिला की स्वतंत्र सहमति, उसकी सेहत, गर्भावस्था के जोखिम और भविष्य में बच्चे के अधिकार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
सरोगेसी को लेकर चिंता जताने वालों का एक गंभीर तर्क है कि आर्थिक असमानता के माहौल में महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाया जा सकता है। इस आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, हर सरोगेसी व्यवस्था को शोषण मान लेना भी उचित नहीं होगा।
जेटेन के मामले में उनकी पार्टी का कहना है कि यह व्यावसायिक व्यवस्था नहीं है और इसमें शामिल महिलाएं अपनी इच्छा से मदद कर रही हैं। इस दावे को स्वीकार करते हुए भी एक व्यापक सिद्धांत बना रहना चाहिए कि किसी भी सरोगेसी व्यवस्था की नैतिकता सिर्फ उसके उद्देश्य से नहीं, बल्कि प्रक्रिया की पारदर्शिता और सभी पक्षों के अधिकारों से तय होगी।
क्या कानून और समाज की सोच एक रफ्तार से बदल रहे हैं?
इस मामले में एक और पेचीदा सवाल कानूनी अभिभावकत्व का है।
नीदरलैंड के मौजूदा कानूनी ढांचे में बच्चे को जन्म देने वाली महिला सामान्य तौर पर उसकी कानूनी मां होती है, भले ही गर्भधारण के लिए किसी दूसरी महिला का एग इस्तेमाल हुआ हो। इच्छुक माता-पिता को कानूनी मान्यता मिलने की प्रक्रिया अलग हो सकती है।
यानी आधुनिक प्रजनन तकनीक से परिवार बनाना संभव हो जाने का मतलब यह नहीं कि कानून से जुड़ी सारी चुनौतियां अपने आप खत्म हो गई हैं।
समाज में परिवारों के नए रूप सामने आने पर कानून को भी बच्चे के हित, अभिभावकों की जिम्मेदारी और जन्म से जुड़ी पहचान जैसे सवालों के स्पष्ट जवाब देने पड़ते हैं।
रॉब जेटेन का प्रधानमंत्री बनना LGBTQ+ समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से ऐतिहासिक घटना है। अब उनका सार्वजनिक रूप से पिता बनने की तैयारी करना यह दिखाता है कि सत्ता के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाले व्यक्ति की पारिवारिक जिंदगी भी परंपरागत सामाजिक धारणाओं से अलग हो सकती है।
लेकिन किसी एक चर्चित व्यक्ति की कहानी को पूरे समाज में समानता स्थापित हो जाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
असल कसौटी यह होगी कि क्या समान अवसर, कानूनी सुरक्षा और सामाजिक सम्मान उन परिवारों को भी मिलते हैं जिनके पास राजनीतिक ताकत, आर्थिक साधन या सार्वजनिक पहचान नहीं है।
बच्चे की भलाई ही बहस का केंद्र क्यों होनी चाहिए?
रॉब जेटेन और निकोलस कीनन के घर बच्चे के आने की खबर को लेकर उत्सुकता स्वाभाविक है। लेकिन उनके परिवार की निजता का सम्मान भी उतना ही जरूरी है।
किसी बच्चे का जन्म उसके माता-पिता की पहचान पर सार्वजनिक जनमत संग्रह नहीं बनना चाहिए।
समलैंगिक माता-पिता के अधिकारों का समर्थन करना और सरोगेसी के नैतिक सवाल उठाना, दोनों एक साथ संभव हैं। इनमें कोई अनिवार्य विरोधाभास नहीं है।
एक संवेदनशील समाज वही होगा जो परिवारों की विविधता को समझे, महिलाओं की स्वायत्तता का सम्मान करे और बच्चों के अधिकारों को सबसे ऊपर रखे।
जेटेन और कीनन की कहानी इसी व्यापक सोच पर विचार करने का मौका देती है।
आखिर किसी परिवार की असली पहचान उसमें रहने वाले लोगों के जेंडर से तय होनी चाहिए या उस भरोसे, सुरक्षा और जिम्मेदारी से, जिसके सहारे एक बच्चा बड़ा होता है?