​रीवा: रीवा जिले की नगर परिषद गुढ़ की स्थानीय राजनीति में गुरुवार को उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया, जब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने अपनी ही परिषद अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा दे दिया। पार्षदों ने संगठन के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता को अपना सामूहिक त्यागपत्र सौंपते हुए नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना सिंह पर भ्रष्टाचार, तानाशाही और विपक्षी दल से सांठगांठ करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

​अध्यक्ष बनते ही विकास रुका, भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप

​भाजपा जिलाध्यक्ष को भेजे गए पत्र में पार्षदों ने उल्लेख किया है कि गुढ़ नगर परिषद चुनाव में भाजपा के टिकट पर 08 पार्षद जीतकर आए थे, जबकि 02 निर्दलीय पार्षदों ने भाजपा को समर्थन दिया था। इस तरह कुल 10 पार्षदों के साथ पार्टी की पूर्ण परिषद गठित हुई थी। जिलाध्यक्ष व क्षेत्रीय विधायक के दिशा-निर्देशों पर सर्वसम्मति से अर्चना सिंह को नगर परिषद अध्यक्ष चुना गया था।

​पार्षदों का आरोप है कि अध्यक्ष पद संभालने के कुछ दिनों बाद ही अर्चना सिंह ने क्षेत्र के विकास कार्यों में रुचि लेना बंद कर दिया और केवल निजी स्वार्थ सिद्ध करने तथा भ्रष्टाचार में लिप्त हो गईं। जब परिषद के पार्षदों ने इस मनमानी और भ्रष्टाचार का विरोध किया, तो अध्यक्ष द्वारा बिना परिषद की अनुमति के कार्य कराए जाने लगे और विरोध करने पर पार्षदों के साथ अभद्र व अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया जाने लगा।

​विरोध करने पर दर्ज कराए गए फर्जी मुकदमे

​इस्तीफा पत्र में पार्षदों ने अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब उन्होंने अध्यक्ष के तानाशाही रवैये और अनियमताओं के खिलाफ आवाज उठाई, तो बदले की भावना से कार्रवाई करते हुए 5 पार्षदों के खिलाफ थाना गुढ़ में झूठे व फर्जी आपराधिक प्रकरण दर्ज करवा दिए गए। आरोप है कि अध्यक्ष द्वारा पार्षदों को लगातार अपमानित और प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे निकाय का माहौल पूरी तरह प्रभावित हुआ है।