NRI Data 2025: विदेशों में भारतीयों की उपस्थिति अब एक वैश्विक शक्ति बन चुकी है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में 3.54 करोड़ से अधिक भारतीय प्रवासी (NRIs) विभिन्न देशों में रह रहे हैं। इनमें से सबसे ज्यादा यानी 54 लाख 9 हजार से अधिक भारतीय अमेरिका में बस चुके हैं।

अमेरिका क्यों है नंबर 1?

तकनीकी क्षेत्र, उच्च शिक्षा, स्टार्टअप संस्कृति, विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं और प्रवासियों के लिए नीतिगत सहयोग—यही वो प्रमुख कारण हैं जो अमेरिका को भारतीयों के लिए सबसे पसंदीदा बना रहे हैं। सिलिकॉन वैली से लेकर न्यूयॉर्क और टेक्सास तक, भारतीय प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है।

Top 10 देश जहां सबसे ज्यादा बसे हैं प्रवासी भारतीय (2025)

क्रमांक देश प्रवासी भारतीयों की संख्या

  • 1 अमेरिका 54,09,062

  • 2 यूएई 35,68,848

  • 3 मलेशिया 29,14,127

  • 4 कनाडा 28,75,954

  • 5 सऊदी अरब 24,63,509

  • 6 म्यांमार 2,02,660

  • 7 ब्रिटेन 18,64,318

  • 8 दक्षिण अफ्रीका 17,00,000

  • 9 श्रीलंका 16,07,500

  • 10 कुवैत 9,95,528

UAE: भारतीयों की दूसरे नंबर की पसंद

दुबई, शारजाह और अबू धाबी जैसे शहरों में निर्माण, पेट्रोलियम और सेवा क्षेत्र में नौकरियों की भरमार के कारण लाखों भारतीय यहां बसे हैं। 35.68 लाख भारतीय फिलहाल UAE में कार्यरत हैं या बस चुके हैं।

मलेशिया, कनाडा और ब्रिटेन – मजबूत सांस्कृतिक जड़ें और अवसर

मलेशिया में भारतीय मूल की आबादी 29.14 लाख है, जो वहां की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में भी भागीदारी निभा रही है। कनाडा में इंडियन स्टूडेंट्स और टेक प्रोफेशनल्स की वजह से रिकॉर्ड प्रवासन हुआ है। वहीं ब्रिटेन में भारतीय समुदाय दशकों से मज़बूत भूमिका निभा रहा है।

क्या कारण है भारतियों की विदेशी मांग?

  • तकनीकी दक्षता – भारतीय IT पेशेवर दुनिया में सबसे ज्यादा डिमांड में हैं।

  • अंग्रेजी भाषा पर पकड़ – इंटरनेशनल वर्किंग कल्चर में यह एक प्रमुख कारण है।

  • मेहनती और अनुशासित स्वभाव – भारतीय श्रमिकों की मेहनत को वैश्विक कॉरपोरेट्स मान्यता देते हैं।

  • सरकारी प्रयास – भारत सरकार की ओर से चलाई जा रही ‘प्रवासी भारतीय दिवस’, ‘भारत को जानो’ और डिजिटल दूतावास सेवाओं ने प्रवासी जुड़ाव को मजबूत किया है।

इन देशों में नहीं रहता कोई भारतीय

पाकिस्तान, अफगानिस्तान, लिबिया, ट्यूनिशिया, वनआतु और सैन मेरिनो जैसे देशों में फिलहाल एक भी भारतीय प्रवासी नहीं रहता। इसका कारण वहां की राजनीतिक अस्थिरता, आतंकी गतिविधियां और अर्थव्यवस्था की बदहाली है।