नयी दिल्ली, 03 अगस्त (कड़वा सत्य) सरकार ने भारतीय जैविक कृषि उपज का निर्यात बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया, जिसमें लेबलिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लॉजिस्टिक्स, प्रमाणीकरण और परीक्षण शामिल हैं।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में सचिव सुनील बर्थवाल ने शनिवार को ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित तीन दिवसीय जैविक, प्राकृतिक और बाजरा उत्पादों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि हाल ही में बजट में गुणवत्ता जांच और खाद्य गुणवत्ता के लिए 100 प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए आवंटन किया गया है, जिससे उद्योग को वैश्विक मानकों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
प्रदर्शनी ‘बीयोफाक इंडिया 2024, नैचुरल एक्सपो इंडिया एवं मिलेट्स इंडिया’ का आयोजन न्यूर्नबर्ग मेस्से और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण- एपीडा ने किया है । यह प्रदर्शनी पांच अगस्त तक चलेगी। इसमें जैविक कृषि उपज बाजार के नवीनतम रुझानों और नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इस अवसर पर श्री बर्थवाल ने ‘भारतीय जैविक बाजार और निर्यात संवर्धन रणनीति का अध्ययन’ पर एपीडा की रिपोर्ट का अनावरण भी किया। इस रिपोर्ट में भारत के जैविक कृषि परिदृश्य, घरेलू रुझान और निर्यात के साथ-साथ मूल्य श्रृंखला में प्रमुख चुनौतियों का विस्तृत आकलन दिया किया गया है।
न्यूर्नबर्ग मेस्से इंडिया की अध्यक्ष पराशर ने बताया कि वर्ष 2023-24 में भारत का जैविक खाद्य निर्यात लगभग 49 अरब 48 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि भारत की विशाल कृषि विविधता और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते भारतीय जैविक उत्पादों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपार संभावनाएं हैं।
इस प्रदर्शनी में जैविक कृषि में लगे 100 से अधिक एफपीओ और एफपीसी भाग ले रहे हैं।
सत्या अशोक
कड़वा सत्य
सरकार का जैविक कृषि उपज के निर्यात पर जोर

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