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Home संपादकीय

स्मार्ट मीटर विवाद और तपते अंधेरे में विकास का मौन

News Desk by News Desk
May 29, 2026
in संपादकीय
स्मार्ट मीटर विवाद और तपते अंधेरे में विकास का मौन
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अमित पांडे: संपादक

उत्तर प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था में संकट केवल तकनीकी नहीं, बल्कि अस्तित्वगत हो चुका है। बिजली चोरी रोकने और बिलिंग सुधारने के नाम पर लाए गए प्रीपेड स्मार्ट मीटरों ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया। अचानक कटौती, फर्जी बिलिंग और मनमाने शुल्कों ने किसानों, व्यापारियों और आम घरों को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि सरकार जनता को “लूट” रही है। कई जिलों में आक्रोशित लोगों ने मीटर सड़कों पर फेंक कर विरोध जताया।

ऊर्जा मंत्री को अंततः पीछे हटना पड़ा और सभी मीटरों को पोस्टपेड में बदलने की घोषणा करनी पड़ी। लेकिन तब तक भरोसा टूट चुका था। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह योजना उपभोक्ताओं के लिए नहीं, बल्कि निजी ठेकेदारों के हित में बनाई गई थी। प्रशासनिक चूकें तब उजागर हुईं जब गाज़ियाबाद और मेरठ के अभियंताओं को निलंबित किया गया। मुख्यमंत्री ने सख़्त जवाबदेही की चेतावनी दी, पर आलोचकों ने इसे महज़ दिखावा बताया।

यह विवाद गहरी बीमारी का संकेत है शासन परिणामों से अधिक दिखावे पर केंद्रित है। 2017 से तीन लाख गाँवों के विद्युतीकरण का दावा किया गया, पर निर्बाध आपूर्ति आज भी दूर की बात है। “उत्तम प्रदेश” का सपना भूतिया बिलिंग, भूतिया जवाबदेही और भूतिया राहत में बदल गया है।

और जब नौतपा की तपिश में सूरज सीधे सिर पर जलता है, तब बिजली विलासिता नहीं बल्कि जीवनरेखा होती है। अस्पतालों में मशीनें ठप पड़ जाती हैं, पानी के पंप रुक जाते हैं, घरों में साँस लेना मुश्किल हो जाता है। लोग सोचने पर मजबूर हैं कि अगर सरकार सबसे गर्म दिनों में भी बिजली नहीं दे सकती, तो “विकास” का अर्थ क्या रह जाता है।

राज्य एक चौराहे पर खड़ा है। यदि उसे विकसित भारत का इंजन बनना है, तो उसे ऊर्जा की सच्चाई से सामना करना होगा—उत्पादन में निवेश, प्रसारण का आधुनिकीकरण और बिलिंग प्रणाली में विश्वास की बहाली। जब तक यह नहीं होता, तब तक जनता अंधेरे में ही जीती रहेगी—सिर्फ बिजली कटौती से नहीं, बल्कि उजाले के टूटे हुए सपने से भी।

Tags: Bijli Bill UPFake Billing Smart MeterNautapa Power CutsPrepaid to Postpaid Meter UPUP Bijli VibhagUP Power CrisisUP Smart Meter Protest
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