अररिया: बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायतों के निर्माण को लेकर बड़ी बैठक, मुखियाओं को मिला लक्ष्य
अररिया जिले में बाल विवाह जैसी कुरीति को खत्म करने के लिए जिला स्तरीय बैठक हुई, जिसमें पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

बिहार के अररिया जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। जिले की तमाम ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने के उद्देश्य से डीआरडीए सभागार में एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय समन्वय, परामर्श एवं उन्मुखीकरण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु यह था कि कैसे सामूहिक प्रयासों से बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए और इस कुप्रथा पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
बैठक के दौरान इस बात पर विस्तार से चर्चा की गई कि एक 'बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत' की अवधारणा क्या है और इसे धरातल पर कैसे उतारा जा सकता है। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि बाल विवाह को रोकने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका सबसे अहम होती है। यदि मुखिया और वार्ड सदस्य जागरूक हों, तो सामुदायिक सहभागिता के जरिए इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। बैठक में विभागीय समन्वय और पंचायत स्तर पर एक प्रभावी कार्य योजना तैयार करने जैसे गंभीर विषयों पर भी मंथन हुआ।
पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका और जागरूकता पर जोर
कार्यक्रम में मौजूद विभिन्न पंचायतों के मुखियाओं को प्रेरित करते हुए कहा गया कि वे अपनी पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि केवल कागजी कार्रवाई से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि इसके लिए निरंतर प्रयास और जमीनी स्तर पर काम करना होगा। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया:
- पंचायत स्तर पर जन-जागरूकता अभियानों को तेज करना।
- सामुदायिक निगरानी तंत्र को मजबूत बनाना ताकि किसी भी संभावित बाल विवाह की सूचना तुरंत मिल सके।
- विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर रोकथाम सुनिश्चित करना।
इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आसीडीएस), पुलिस उपाधीक्षक, सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई।