बिहार

समस्तीपुर की अंजू कुमारी का अनोखा आइडिया, रागी के समोसे-मोमोज बेचकर 20 महिलाओं की जिंदगी बदलने की पहल

समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय प्रखंड,बंबईया हरलाल पंचायत के ओरियामा गांव की रहने वाली किसान अंजू कुमारी आज अपने इलाके की महिलाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन गई हैं। अंजू ने सिर्फ अपनी ही नहीं, बल्कि अपने साथ-साथ 20 अन्य महिलाओं की आमदनी को दोगुना करने का एक ऐसा तरीका खोज निकाला है, जिसकी आज हर तरफ चर्चा हो रही है।

AAasim· 28 Oct, 10:47 PM · 2 मिनट
समस्तीपुर की अंजू कुमारी का अनोखा आइडिया, रागी के समोसे-मोमोज बेचकर 20 महिलाओं की जिंदगी बदलने की पहल

_28 अक्टूबर, समस्तीपुर/पटना। _आजकल बाजार में फास्ट फूड की भरमार है, लेकिन अगर हम कहें कि आपके पसंदीदा समोसे और मोमोज न सिर्फ स्वादिष्ट हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद हैं, तो क्या आप यकीन करेंगे? समस्तीपुर जिले की एक महिला किसान ने अपनी सूझबूझ और आत्मा योजना की मदद से इसे संभव कर दिखाया है।

समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय प्रखंड,बंबईया हरलाल पंचायत के ओरियामा गांव की रहने वाली किसान अंजू कुमारी आज अपने इलाके की महिलाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन गई हैं। अंजू ने सिर्फ अपनी ही नहीं, बल्कि अपने साथ-साथ 20 अन्य महिलाओं की आमदनी को दोगुना करने का एक ऐसा तरीका खोज निकाला है, जिसकी आज हर तरफ चर्चा हो रही है।

पूसा से लिया प्रशिक्षण, आत्मा के सहयोग से बनाया समूह

अंजू कुमारी की सफलता की यह कहानी आत्मा योजना से शुरू होती है। अंजू बताती हैं, "मैंने पूसा यूनिवर्सिटी से मिलेट (मोटे अनाज) का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद श्री अनाज महिला खाद्य सुरक्षा समूह, जो आत्मा के तहत पंजीकृत है, के जरिए हमने 20 महिलाओं को जोड़कर एक समूह बनाया।"

इस समूह को बनाने का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। अंजू ने इन महिलाओं के लिए पाठशाला चलवाई, जहां उन्हें मिलेट्स की खेती और उसके फायदे बताए गए। वे समय-समय पर इन महिलाओं को अपनी जमीन पर मिलेट्स लगाने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित करती रहती हैं।

हम बाजार में अनाज नहीं बेचते, बल्कि उससे उत्पाद बनाते हैं

अंजू की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने फसल उपजाने के बाद उसे सीधे बाजार में बेचने के बजाय, उसका एक नया और ज्यादा मुनाफे वाला रास्ता चुना।

अंजू बड़े गर्व के साथ अपनी यह अनूठी पहल साझा करती हैं, "हम इस समूह के साथ मिलकर इसका जो उत्पादन होता है, उसे बाजार में नहीं बेचते, बल्कि हम उसका उत्पाद बनाकर बेचते हैं।"

उन्होंने मोटे अनाज, खासतौर पर रागी,मडुआ से फास्ट फूड और मिठाइयां बनानी शुरू कर दीं। वे बताती हैं, "उत्पाद के रूप में हम रागी का समोसा, रागी की झिल्ली, रागी का मोमोज, रागी का डोसा, रागी की इडली और रागी के लड्डू जैसे कई व्यंजन बनाकर बेच रहे हैं।"

इन व्यंजनों को बनाकर वे न केवल लोगों को सेहतमंद विकल्प दे रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी यह व्यंजन बनाना सिखा रही हैं। अंजू की इस छोटी सी लेकिन बेहद स्मार्ट सोच ने आज उनके परिवार की आय को दोगुना कर दिया है।

कृषि विभाग का जताया आभार

अपनी इस शानदार सफलता का श्रेय सरकार की योजनाओं को देते हुए अंजू कहती हैं, "मैं कृषि विभाग और आत्मा का बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूं, जिनके द्वारा हमें समय-समय पर प्रशिक्षण मिला और हम इस तरह की खेती और व्यवसाय कर पा रहे हैं।"

अंजू कुमारी की यह कहानी बताती है कि जब महिलाएं सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाती हैं और अपनी रचनात्मक सोच को काम में लाती हैं, तो वे न केवल अपने लिए बल्कि पूरे समाज के लिए स्वावलंबन और स्वास्थ्य का एक नया रास्ता खोल सकती हैं।

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