सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा पुल निर्माण में आई तेजी, 2027 तक शुरू होगा महासेतु
सुल्तानगंज और अगुवानी घाट के बीच बन रहे फोरलेन महासेतु के काम में आई तेजी, 2027 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद। जानें पूरी डिटेल।

बिहार के भागलपुर और खगड़िया के बीच गंगा नदी पर बन रहे महत्वाकांक्षी फोरलेन महासेतु के निर्माण कार्य ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। सुल्तानगंज और अगुवानी घाट को जोड़ने वाले इस पुल का इंतजार लंबे समय से हो रहा है। हाल ही में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के चेयरमैन धर्मेंद्र कुमार ने मौके पर पहुंचकर काम का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
करीब 1,710 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहे इस पुल की कुल लंबाई एप्रोच रोड समेत 25 किलोमीटर है, जबकि मुख्य पुल 3.16 किलोमीटर लंबा है। प्रशासन ने अब इसे नवंबर-दिसंबर 2027 तक पूरा कर जनता के लिए खोलने का लक्ष्य रखा है। इस पुल का पूरा होना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि विक्रमशिला सेतु पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है और उसकी हालत भी जर्जर हो चुकी है, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क बनाए रखना एक चुनौती बन गया है।
डिजाइन में बदलाव और युद्धस्तर पर काम
बता दें कि फरवरी 2014 में शिलान्यास के बाद यह प्रोजेक्ट कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। साल 2022, 2023 और 2024 में पुल के कुछ हिस्से गिरने के बाद इसकी मजबूती और डिजाइन पर सवाल उठे थे। अब इस समस्या को दूर करने के लिए आईआईटी रुड़की, गुवाहाटी और मध्यप्रदेश के विशेषज्ञों की देखरेख में संशोधित डिजाइन तैयार किया गया है।
पुल को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने के लिए सुल्तानगंज की तरफ पिलर संख्या 2 से 5 के बीच तीन नए अतिरिक्त पिलर बनाए जा रहे हैं। वहीं, गंगा की बीच धारा में पाया संख्या 10, 11 और 12 पर फाउंडेशन ढलाई और वेलकैप कटिंग का काम 24 घंटे शिफ्ट में चलाया जा रहा है। निर्माण एजेंसी एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन ने 100 सदस्यों की एक विशेष तकनीकी टीम तैनात की है, जो युद्धस्तर पर काम कर रही है।
इस पुल की एक खास बात यह भी है कि इसके पाया संख्या-10 पर पर्यटकों के लिए एक 'डॉल्फिन ऑब्जर्वेटरी' बनाई जा रही है। यहां से लोग गंगा की प्रसिद्ध डॉल्फिन का नजारा ले सकेंगे। जब यह पुल पूरी तरह चालू हो जाएगा, तो न केवल भागलपुर और खगड़िया, बल्कि सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और झारखंड के इलाकों के बीच व्यापार और आवागमन बेहद आसान हो जाएगा।