दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर अवैध बस स्टॉप से भीषण जाम, यात्रियों की जान जोखिम में
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बसों के अवैध ठहराव से लगा भीषण जाम। गाजीपुर के पास 650 मीटर चलने में लग रहे 45 मिनट, यात्रियों की जान जोखिम में।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (NE3) इन दिनों ट्रैफिक जाम का केंद्र बन गया है। राज्य परिवहन और निजी बस ऑपरेटरों द्वारा हाईवे की लेनों को ही makeshift टर्मिनल की तरह इस्तेमाल करने की वजह से यहां हालात बदतर हो गए हैं। बसें बीच सड़क पर रुककर सवारियां बैठा रही हैं और सामान लोड कर रही हैं, जिससे एक्सप्रेसवे पर चलने वाले अन्य वाहनन फंस रहे हैं।
सबसे बुरा हाल गाजीपुर राउंडअबाउट और फ्लावर मार्केट क्रॉसिंग के पास देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां ट्रैफिक का दबाव इतना ज्यादा है कि महज 650 मीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को 45 मिनट तक का समय लग रहा है। दिवाली से पहले गाजीपुर फूल मंडी में बढ़ी हलचल और डिलीवरी वाहनों की भीड़ ने इस समस्या को और अधिक गंभीर बना दिया है।
खतरनाक हो रहा सफर, नियमों की उड़ रही धज्जियां
हाईवे पर हो रही इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। लोग खुले आसमान के नीचे घंटों इंतजार करते हैं और भारी ट्रैफिक के बीच कंक्रीट डिवाइडरों को पार कर बसों तक पहुंचते हैं, जो किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसा है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मौके पर कानून व्यवस्था या पुलिस की मौजूदगी न के बराबर दिखती है।
नियमों के मुताबिक, सभी अंतरराज्यीय और निजी कॉन्ट्रैक्ट बसें केवल निर्धारित टर्मिनलों जैसे कश्मीरी गेट, आनंद विहार और सराय काले खां से ही संचालित होनी चाहिए। दिल्ली सरकार ने सितंबर 2026 में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि यात्री सुरक्षा सर्वोपरि है और बसों के लिए प्री-बुकिंग टिकट व पैसेंजर मेनिफेस्ट रखना अनिवार्य है।
मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जाने वाली बसें इस तरह अवैध रूप से सवारियां उठा रही हैं। प्रशासन ने पहले ही चेतावनी दी है कि फ्लाईओवर्स या मुख्य सड़कों पर अवैध ठहराव करने वाली बसों को जब्त किया जा सकता है, उनके परमिट निलंबित किए जा सकते हैं और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। अब देखना यह है कि दिल्ली परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस इन नियमों को जमीन पर कितनी सख्ती से लागू करती है।