अपराध

DU छात्रा से 6 हजार की ठगी, दिल्ली पुलिस ने खोला 30 करोड़ के साइबर फ्रॉड का राज

दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा से हुई छोटी सी ठगी ने खोला 30 करोड़ के बड़े साइबर फ्रॉड का राज। पुलिस ने 7 आरोपियों को किया गिरफ्तार।

Sonu Nigam· 27 Oct, 12:08 PM · 2 मिनट
DU छात्रा से 6 हजार की ठगी, दिल्ली पुलिस ने खोला 30 करोड़ के साइबर फ्रॉड का राज

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसकी शुरुआत महज 6,450 रुपये की एक छोटी सी शिकायत से हुई। दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा के साथ हुई इस मामूली ठगी ने पुलिस को एक ऐसे सिंडिकेट तक पहुँचाया, जिसने अब तक 30 करोड़ रुपये से ज्यादा का हेरफेर किया है। इस मामले में पुलिस ने ग्रेटर नोएडा और कानपुर से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पूरा मामला 4 सितंबर 2026 को शुरू हुआ, जब रामजस कॉलेज की दूसरे वर्ष की छात्रा फातिमा ने शिकायत दर्ज कराई। फातिमा ने इंस्टाग्राम पर 'Kavya_kurti_hub' नाम के एक अकाउंट से कपड़े खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन बदले में उसके साथ 6,450 रुपये की धोखाधड़ी हो गई। जब एसीपी विशेष धत्तरवाल और एडिशनल डीसीपी राम दुलेश मीणा के नेतृत्व में टीम ने इस पैसे का पीछा किया, तो मामला ग्रेटर नोएडा की एक कंपनी 'किज़ेंटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड' (Kizentech Solutions Pvt Ltd) तक जा पहुँचा।

फर्जी कंपनियों के जरिए चल रहा था 'म्यूल अकाउंट' का खेल

डीसीपी (नॉर्थ) निहारिका भट्ट ने बताया कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। आरोपियों ने किज़ेंटेक सॉल्यूशंस, एग्जीक्यूटिव एज और नेक्सकोर जैसी फर्जी फर्में बनाई थीं, ताकि वे बैंक खाते खोल सकें। इन खातों का इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट' के तौर पर किया जाता था, जिन्हें अन्य साइबर ठगों को मंथली कमीशन पर दिया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन अमेरिका स्थित व्हाट्सएप नंबरों के जरिए हो रहा था, जिन्हें 'मैक्सवेल' और 'सोलिटेयर' जैसे कोड नामों से पहचाना गया है।

पुलिस ने 16 अक्टूबर 2026 को ग्रेटर नोएडा में छापेमारी कर गौरव पांडे, आदित्य मिश्रा, आयुष वर्मा, अभिषेक पाल, हिमांशु राणा और राहुल कुमार को दबोचा। इसके बाद 21 अक्टूबर को कानपुर से सातवें आरोपी उदित प्रताप सिंह भदौरिया को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस की इस कार्रवाई में भारी मात्रा में डिजिटल और बैंकिंग सबूत बरामद हुए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • 20 मोबाइल फोन और 45 सिम कार्ड
  • 39 पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनें
  • 33 डेबिट कार्ड और 28 चेक बुक
  • 15 स्कैनर और 2 लैपटॉप

जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क अलग-अलग राज्यों में दर्ज 27 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा हुआ है। पुलिस अब केनरा बैंक और पाइन लैब्स मर्चेंट के डेटा के जरिए इस अवैध लेनदेन की पूरी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

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