पीएम मोदी के पिता पर अभद्र टिप्पणी: कांग्रेस अध्यक्षमल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ पटना पुलिस मे शिकायत
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा पीएम मोदी के पिता पर की गई टिप्पणी के बाद बीजेपी ने पटना में पुलिस शिकायत दर्ज कराई है।

बिहार की राजधानी पटना में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी ने देश में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इस विवाद के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए खड़गे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है और पटना के कोतवाली थाने में औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराई है।
यह पूरा मामला 25 अक्टूबर 2026 का है, जब बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्री कृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर बापू सभागार में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए खड़गे अपना संबोधन दे रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ से आए एक हस्तक्षेप के बाद खड़गे अपना आपा खो बैठे और उन्होंने कथित तौर पर तीन बार यह वाक्य दोहराया कि "मोदी के पिता भी जाएंगे।"
बीजेपी का आक्रोश और देशव्यापी विरोध की तैयारी
खड़गे के इस बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बीजेपी बिहार राज्य कार्यकारिणी के सदस्य कृष्ण सिंह कल्लू ने कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि इन टिप्पणियों से जनता की भावनाएं आहत हुई हैं। बीजेपी ने इस मुद्दे पर केवल कानूनी रास्ता ही नहीं चुना, बल्कि पूरे देश के राज्य मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पटना के इनकम टैक्स सर्कल पर खड़गे का पुतला फूंका जाएगा।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस बयान को बेहद अमर्यादित बताते हुए कांग्रेस पार्टी से तुरंत माफी की मांग की है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनावी हार के कारण कांग्रेस अब 'गाली वाली राजनीति' पर उतर आई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और नितिन नबीन ने भी इस भाषा को 'गुंडागर्दी' जैसा बताया और इसे राजनीतिक हताशा का परिणाम करार दिया।
दूसरी ओर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मल्लिकार्जुन खड़गे का बचाव किया है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी इस मामले को अनावश्यक रूप से तूल दे रही है और यह राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। कांग्रेस समर्थकों का तर्क है कि खड़गे की टिप्पणी एक आम बोलचाल की अभिव्यक्ति थी, न कि प्रधानमंत्री के परिवार के प्रति कोई अपमानजनक शब्द। फिलहाल, इस घटना ने देश की दो सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।