दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 17 साल की रेप पीड़िता को 29 हफ्ते की प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन की अनुमति
दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 साल की रेप पीड़िता को 29 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की इजाजत दी है। कोर्ट ने इसे गरिमा के साथ जीने का अधिकार बताया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील मामले में मानवीय आधार पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक 17 साल की नाबालिग रेप पीड़िता को उसकी 29 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को समाप्त (Medical Termination of Pregnancy) करने की अनुमति दे दी है। जस्टिस हरीश वशिष्ठ शंकर ने यह आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल कानूनी समय सीमा को आधार नहीं बनाया जा सकता, बल्कि पीड़िता की परिस्थितियों और उसके अधिकारों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट, 1971 के तहत तय 24 हफ्ते की समय सीमा को पत्थर की लकीर नहीं माना जाना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करते हुए पीड़िता की उम्र, मेडिकल रिपोर्ट और उसके मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखना अनिवार्य है। जस्टिस शंकर ने जोर देकर कहा कि यौन हमले के कारण हुई अनचाही प्रेग्नेंसी को जारी रखने के लिए किसी नाबालिग को मजबूर करना और उसे जबरन मां बनाना, गरिमा के साथ जीने के उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और कोर्ट के निर्देश
इस फैसले से पहले दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के एक मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की जांच की थी। बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की कि नाबालिग इस प्रक्रिया के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फिट है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट को आधार मानते हुए गर्भपात की अनुमति दी।
मामले की गंभीरता और चल रही कानूनी कार्रवाई को देखते हुए कोर्ट ने कुछ सख्त निर्देश भी दिए हैं:
- DNA विश्लेषण: ख्याला पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR की जांच को आगे बढ़ाने के लिए कोर्ट ने आदेश दिया है कि भ्रूण के ऊतकों (fetal tissues) को सुरक्षित रखा जाए ताकि अनिवार्य डीएनए टेस्ट किया जा सके।
- खर्च और गोपनीयता: इस पूरी प्रक्रिया का सारा मेडिकल खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी। साथ ही, पीड़िता की पहचान को पूरी तरह गुप्त रखने के आदेश दिए गए हैं।
- आपातकालीन स्थिति: कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश बच्चा जीवित पैदा होता है, तो उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जाए और इसकी सूचना तुरंत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को दी जाए।