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दिल्ली हाई कोर्ट ने वकीलों और कोर्ट स्टाफ को प्री-BS-VI वाहनों के एंट्री बैन से दी राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने वकीलों और कोर्ट स्टाफ को प्री-BS-VI वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध से राहत दी है। जानें क्या है पूरा आदेश।

Sonu Nigam· 8 Nov, 8:30 PM · 2 मिनट
दिल्ली हाई कोर्ट ने  वकीलों और कोर्ट स्टाफ को प्री-BS-VI वाहनों के एंट्री बैन से दी राहत

दिल्ली की सड़कों पर बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए लागू किए गए कड़े नियमों के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों को उन बाहरी राज्यों के वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध से छूट दे दी है, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं। यह राहत केवल कोर्ट के कामकाज के दिनों के लिए दी गई है, ताकि न्यायिक कार्यों में कोई बाधा न आए।

दरअसल, दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए 'विंटर एक्शन प्लान' तैयार किया था। इसके तहत 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 के बीच उन वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाई गई है, जो दिल्ली में रजिस्टर्ड नहीं हैं और BS-VI मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इस नियम को पर्यावरण और वन विभाग ने 23 जून को जारी एक अधिसूचना के जरिए लागू किया था।

न्यायिक कार्यों की अनिवार्यता बनी छूट का आधार

इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन के माध्यम से याचिका दायर की थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि कानूनी पेशेवर और कोर्ट स्टाफ आवश्यक न्यायिक कार्यों से जुड़े होते हैं, जिन्हें रोजाना कोर्ट आना पड़ता है, इसलिए उन्हें इस प्रतिबंध से राहत मिलनी चाहिए। जस्टिस अमित महाजन ने इन दलीलों को सुनते हुए यह विशेष छूट प्रदान की है।

हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह छूट केवल वकीलों और कोर्ट स्टाफ के लिए है, आम जनता के लिए नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे। साथ ही, यह भी साफ किया गया कि यह आदेश 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के तहत लगाए जाने वाले और अधिक सख्त नियमों से कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करता है। गौरतलब है कि इससे पहले नवंबर की शुरुआत में एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने सरकार के व्यापक वाहन प्रतिबंध पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

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