दिल्ली के मुस्तफाबाद में वोटर लिस्ट से नाम हटाने का खेल, जांच में बड़ा खुलासा
दिल्ली के मुस्तफाबाद निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिशों का खुलासा हुआ है। जानें क्या है पूरा मामला।

दिल्ली के मुस्तफाबाद निर्वाचन क्षेत्र में वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की एक संदिग्ध कोशिश सामने आई है। एक जांच में यह बात उभरकर आई है कि विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाया गया। 31 अगस्त 2026 से शुरू हुए दावों और आपत्तियों के चरण में अधिकारियों को 843 फॉर्म-7 आवेदन मिले थे, जिनकी संख्या अक्टूबर के अंत तक बढ़कर 1,000 से ज्यादा हो गई।
हैरानी की बात यह है कि डेटा के मुताबिक, इन तीसरे पक्ष के आवेदनों में से लगभग 94% से 96% आवेदन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बूथ स्तर के एजेंटों (BLA) द्वारा दाखिल किए गए थे। जब जमीनी स्तर पर जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। दयालपुर इलाके के पोलिंग बूथ नंबर 129 पर जब उन लोगों की तलाश की गई जिनके नाम 'अनुपस्थित', 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' या 'मृत' बताकर हटाने की मांग की गई थी, तो वे सभी अपने रजिस्टर्ड पते पर मौजूद पाए गए।
एजेंटों ने झाड़ा पल्ला, चुनाव अधिकारी ने दिए सख्त निर्देश
इस पूरे मामले में एक और मोड़ तब आया जब आधिकारिक रिकॉर्ड में बीएलए के रूप में पहचाने गए 20 व्यक्तियों में से 16 ने इन आवेदनों पर हस्ताक्षर करने या इन्हें दाखिल करने से साफ इनकार कर दिया। कुछ एजेंटों ने तो यहाँ तक दावा किया कि उनकी सहमति के बिना उनके क्रेडेंशियल्स (पहचान विवरण) का इस्तेमाल किया गया है।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के नियमों के मुताबिक, थोक में आवेदन दाखिल करने वालों को लिखित अंडरटेकिंग देनी होती है। साथ ही, 9 अक्टूबर 2026 को जारी एक निर्देश में यह तय किया गया था कि एक मतदाता अधिकतम 10 आपत्तियां ही दर्ज करा सकता है।
इस विवाद के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) अजय कुमार ने स्पष्ट किया है कि चुनाव अधिकारी अब हर उस मतदाता का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कर रहे हैं, जिसका नाम हटाने की मांग की गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि सत्यापन के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा और गलत या शरारती आवेदन जमा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।