दिल्ली एनसीआर

दिल्ली-NCR में जानें कौन सी गाड़ियां प्रतिबंधित हैं और क्या हैं नए नियम।

1 नवंबर से दिल्ली-NCR में BS-4 कमर्शियल वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगेगी। जानें कौन सी गाड़ियां प्रतिबंधित हैं और क्या हैं नए नियम।

Sonu Nigam· 25 Oct, 6:20 AM · 2 मिनट
दिल्ली-NCR में जानें कौन सी गाड़ियां प्रतिबंधित हैं और क्या हैं नए नियम।

दिल्ली और आसपास के इलाकों में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। 1 नवंबर 2026 से दिल्ली-NCR (NCR) से आने वाले BS-4 कमर्शियल वाहनों और बसों के प्रवेश पर कड़े प्रतिबंध लागू होने जा रहे हैं। यह कदम 'विंटर एक्शन प्लान' का हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सर्दियों में हवा की गुणवत्ता को सुधारना है। ये नियम 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे, जबकि कुछ प्रावधान 28 फरवरी 2027 तक जारी रह सकते हैं।

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) द्वारा संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत, दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-4 और उससे पुराने डीजल लाइट, मीडियम और हैवी कमर्शियल वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इन वाहनों को दी गई एक साल की छूट की अवधि 31 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रही है। हालांकि, दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहनों को इस विशेष एंट्री बैन से छूट दी गई है। केवल BS-6 मानक वाले वाहन, या CNG, LNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश मिलेगा।

PUC सर्टिफिकेट के बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने "नो PUC, नो फ्यूल" पॉलिसी को भी सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। 1 नवंबर से किसी भी पेट्रोल पंप पर उस वाहन में ईंधन नहीं भरा जाएगा, जिसके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण (PUC) सर्टिफिकेट नहीं होगा। इसके अलावा, GRAP स्टेज III के तहत दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और सोनीपत में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल फोर-व्हीलर्स पर भी अतिरिक्त प्रतिबंध लागू होंगे। केवल दिव्यांगजनों के लिए विशेष रूप से संशोधित वाहनों को ही इससे छूट मिलेगी।

गाजियाबाद और बुलंदशहर जैसे पड़ोसी जिलों के परिवहन विभागों ने ट्रांसपोर्ट यूनियनों और ऑपरेटरों को इन नियमों और उल्लंघन पर होने वाले जुर्माने के बारे में जागरूक करना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, ऑल इंडिया मोटर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (AIMGTA) ने सरकार से अपील की है कि इन नियमों को पूरी तरह लागू करने से पहले 15 दिनों का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाए, ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, औद्योगिक कामकाज और रोजगार पर पड़ने वाले असर का आकलन किया जा सके।

यह ख़बर दोस्तों तक पहुँचाएँ
शेयर करें

Comments

Leave a comment