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गाजियाबाद में कैंसर इलाज की भारी कमी, दिल्ली के अस्पतालों की ओर भाग रहे मरीज

गाजियाबाद में कैंसर सुविधाओं की कमी से मरीज परेशान हैं। इलाज के लिए दिल्ली या महंगे प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।

Sonu Nigam· 8 Nov, 7:33 AM · 1 मिनट
गाजियाबाद में कैंसर इलाज की भारी कमी, दिल्ली के अस्पतालों की ओर भाग रहे मरीज

गाजियाबाद के कैंसर मरीजों के लिए शहर में इलाज कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। जिले में व्यापक डायग्नोस्टिक और इलाज की सुविधाओं के अभाव के कारण मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहाँ कोई ऐसा सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं है जहाँ ऑन्कोलॉजी (कैंसर विज्ञान) की पूरी सुविधाएं उपलब्ध हों, जिसकी वजह से समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो गया है।

स्थानीय सुविधाओं की कमी के कारण गाजियाबाद के निवासियों के पास अब दो ही रास्ते बचते हैं—या तो वे दिल्ली के अस्पतालों का रुख करें या फिर शहर के बेहद महंगे प्राइवेट अस्पतालों की जेब ढीली करें। स्वास्थ्य ढांचे की इस बदहाली ने आम आदमी के लिए कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ना और भी कठिन बना दिया है।

दिवाली अलर्ट और दवाओं की कीमतों में कटौती

एक तरफ जहाँ कैंसर सुविधाओं की कमी है, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग ने आगामी दिवाली त्योहार को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सचिन वैश ने जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि वे बर्न यूनिट और इमरजेंसी सेवाओं को पूरी क्षमता के साथ तैयार रखें, ताकि पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं और चोटों का तुरंत इलाज किया जा सके।

राहत की बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर के इलाज को सस्ता बनाने की कोशिशें जारी हैं। रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने घोषणा की है कि नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 1,000 से अधिक ब्रांडेड एंटी-कैंसर दवाओं की कीमतों में कटौती का आदेश दिया है। इनमें से 137 विशिष्ट एंटी-कैंसर दवाओं की संशोधित कीमतें 9 नवंबर, 2026 से लागू होंगी, जिससे देशभर के मरीजों को महंगी दवाओं से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

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