होमबायर्स को ठगा! पार्सवनाथ डेवलपर्स के दो डायरेक्टर न्यायिक हिरासत में भेजे गए
दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने होमबायर्स को रिफंड न देने पर पार्सवनाथ डेवलपर्स के दो डायरेक्टर्स को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।
दिल्ली के होमबायर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए पार्सवनाथ डेवलपर्स के दो डायरेक्टर्स, संजीव कुमार जैन और राजीव जैन को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई 46 अलग-अलग होमबायर्स के मामलों में रिफंड और मुआवजे की राशि का भुगतान न करने के कारण की गई है। आयोग ने इन दोनों डायरेक्टर्स को 18 नवंबर, 2026 तक न्यायिक हिरासत में रखने का फैसला सुनाया है।
यह पूरा मामला तब गरमाया जब आयोग की अध्यक्ष जस्टिस संगिता ढींगरा सहगल की अगुवाई वाली बेंच ने पाया कि कंपनी के डायरेक्टर कानूनी प्रक्रिया से लगातार बच रहे थे। आयोग ने इस मामले में खुद संज्ञान (suo motu) लिया और पाया कि होमबायर्स को उनका हक दिलाने के लिए दिए गए आदेशों की अनदेखी की गई। सुनवाई के दौरान दोनों डायरेक्टर्स को तिहार जेल से पेश किया गया।
चेक बाउंस और कानूनी दांव-पेच से नहीं बच पाए डायरेक्टर
सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब एक होमबायर अभिषेक मुंधरा के मामले को वापस लेने की कोशिश की गई। दावा किया गया कि कोर्ट के बाहर समझौता हो गया है, लेकिन आयोग ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक भुगतान का कोई आधिकारिक लिखित दस्तावेज पेश नहीं किया जाता, तब तक केस जारी रहेगा। साथ ही, आयोग ने कंपनी के पिछले रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि उनके द्वारा दिए गए चेक पहले भी बाउंस हो चुके हैं, इसलिए केवल भरोसे पर केस बंद नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने डायरेक्टर्स के कानूनी इतिहास पर भी कड़ी टिप्पणी की। रिकॉर्ड के मुताबिक, इन डायरेक्टर्स के खिलाफ 5 मामलों में गिरफ्तारी वारंट जारी हैं, 7 मामलों में उन्हें 'घोषित अपराधी' (proclaimed offenders) करार दिया जा चुका है और 34 अन्य मामलों में ऐसी ही कार्यवाही लंबित है।
गौरतलब है कि यह न्यायिक हिरासत विशेष रूप से उपभोक्ता आयोग की निष्पादन याचिकाओं से जुड़ी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में कंपनी की दिवालियापन (insolvency) की प्रक्रिया अलग से चल रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उन होमबायर्स को कन्वेयेंस डीड निष्पादित करने की अनुमति दी है जिनके प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं।