“एक यात्रा, जो पद से नहीं—सेवा के संकल्प से शुरू हुई और राष्ट्र निर्माण के संकल्प तक निरंतर आगे बढ़ रही है।”

7 अक्टूबर 2001—गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण से सरकार के प्रमुख के रूप में उनकी सार्वजनिक यात्रा का एक नया अध्याय प्रारंभ हुआ। 7 अक्टूबर 2026 को इस यात्रा के 25 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने स्वयं 7 अक्टूबर 2025 को सरकार के प्रमुख के रूप में अपने 25 वें वर्ष में प्रवेश करते हुए कहा था कि इन वर्षों में उनका निरंतर प्रयास लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के साथ राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान दे रहा है।

“सेवा संकल्प अभियान” प्रधानमंत्री मोदी की इस 25 वर्षीय यात्रा को केवल राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में नहीं, बल्कि सुशासन, जनकल्याण, आत्मनिर्भरता, तकनीकी परिवर्तन और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका के संदर्भ में देखने का अवसर है।

अंत्योदय : विकास का अंतिम व्यक्ति तक विस्तार

मोदी सरकार के कार्य अवधि में जनधन खातों, डिजिटल भुगतान, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और आवास जैसी योजनाओं ने कल्याणकारी नीतियों को बड़े पैमाने पर लागू करने का प्रयास किया। सरकार का घोषित दृष्टिकोण बहुत ही स्पष्ट रहा है कि विकास का प्रत्यक्ष लाभ समाज के अंतिम पायदान तक पहुँचे और गरीब, महिला, किसान तथा युवा विकास प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार बनें।

इसी सोच को प्रधानमंत्री के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के व्यापक मंत्र से जोड़ा है।

निर्णय, सुधार और बदलता शासन

2014 के बाद केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत और संवैधानिक निर्णय लिए। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से संबंधित अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में परिवर्तन और राज्य के पुनर्गठन, मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के माध्यम से तत्काल तीन तलाक को अपराध घोषित करना तथा अनेक प्रशासनिक एवं आर्थिक सुधार इस दौर के प्रमुख निर्णयों में रहे हैं ।

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी इस काल की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं में रहा, हालांकि इसका मूल आधार 2019 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय और उसके बाद गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रक्रिया रही है ।

इन घटनाओं ने भारतीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श को व्यापक रूप से प्रभावित किया है —जिसकी व्याख्या अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोणों से की जाती रही है।

अर्थव्यवस्था : विकास और डिजिटल परिवर्तन

फ्रेजाइल फाइव से टॉप फाइव: 2014 से पहले भारत को दुनिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन आज भारत दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले दशक में उल्लेखनीय विस्तार किया है। आज भारत दुनिया की प्रमुख बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वर्तमान में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही है ।

जनधन–आधार–मोबाइल के विस्तार और यूपीआई जैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्लेटफॉर्म ने वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेनदेन को व्यापक बनाया है। साथ ही मेक इन इंडिया, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई), आत्मनिर्भर भारत और सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से विनिर्माण एवं रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

वैश्विक क्षितिज पर भारत: 'ग्लोबल साउथ' से 'ग्लोबल वेस्ट' तक बढ़ता आदर

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति ने 'समान दूरी' के पुराने दौर को पीछे छोड़कर 'समान मित्रता और वैश्विक प्रभाव' के एक नए युग में प्रवेश किया है। उनकी लोकप्रियता और कूटनीतिक कौशल का विस्तार आज पूरी दुनिया में देखा जा सकता है।

जी 20 की भारत की अध्यक्षता, अफ्रीकी संघ को जी 20 का स्थायी सदस्य बनाने का निर्णय, क्वाड और ब्रिक्स जैसे मंचों में सक्रिय भागीदारी तथा ग्लोबल साऊथ से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण आयाम रहे हैं।

कोविड-19 के दौरान वैक्सीन मैत्री, यूक्रेन से भारतीय नागरिकों की निकासी के लिए ऑपरेशन गंगा तथा इजरायल से नागरिकों की निकासी के लिए ऑपरेशन अजय जैसे अभियानों ने संकट के समय भारत की क्षमता और विदेश नीति के मानवीय पक्ष को सामने रखने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है ।

ग्लोबल साउथ की मुखर आवाज: अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के विकासशील देशों के लिए पीएम मोदी एक मसीहा और मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं। जी-20 में अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाना इसका जीवंत उदाहरण है। संकट के समय 'वैक्सीन मैत्री' और तत्काल मानवीय सहायता भेजकर उन्होंने साबित किया कि भारत दुनिया में संकटग्रस्त एवं प्राकृतिक आपदा ग्रस्त देशों के लिए हमेशा सच्चा मददगार रहा है।

ग्लोबल वेस्ट में अभूतपूर्व स्वीकार्यता: अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित राष्ट्रों में पीएम मोदी की लोकप्रियता आज शीर्ष पर है। द्विपक्षीय कूटनीति से परे, महाशक्तियों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ उनका व्यक्तिगत तालमेल भारत की रणनीतिक ताकत को दर्शाता है। क्वाड से लेकर विभिन्न वैश्विक मंचों पर आज पश्चिमी देश भी भारत की प्राथमिकताओं और नीतियों का खुले दिल से सम्मान कर रहे हैं।

विश्व शांति के सूत्रधार: वैश्विक संघर्षों के बीच "यह युद्ध का युग नहीं है" का उनका उद्घोष आज अंतरराष्ट्रीय शांति का मूल मंत्र बन चुका है। 'वसुधैव कुटुंबकम' के इस भाव ने उन्हें दुनिया का सबसे लोकप्रिय और सम्मानित नेता बनाया है।

सुरक्षा से अंतरिक्ष तक

आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नीति में 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक महत्वपूर्ण घटनाएँ रही है । इसके साथ ही रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात बढ़ाने की दिशा में भी नीतिगत सफल एवं ऐतिहासिक प्रयास हुए हैं।

वहीं चंद्रयान-3 की 23 अगस्त 2023 को सफल सॉफ्ट लैंडिंग ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बनाया जिसने भारत की अंतरिक्ष क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दी है । आदित्य-एल-1, गगनयान और आगे के अंतरिक्ष अभियानों ने इस वैज्ञानिक यात्रा को और भी आगे बढ़ाया है।

विरासत और आधुनिकता का संगम

काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक और केदारनाथ सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का विकास, योग को वैश्विक मंच पर बढ़ावा और “विरासत भी, विकास भी” की अवधारणा इस दौर के सांस्कृतिक विमर्श के प्रमुख हिस्से रहे हैं।

इसी के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बहु विषयक शिक्षा, कौशल, मातृभाषा, अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा पर अधिक जोर देने का ढांचा प्रस्तुत किया है ।

विकसित भारत @2047: अगला संकल्प

25 वर्ष की शासन-यात्रा का अगला बड़ा लक्ष्य “विकसित भारत @2047” है—अर्थात स्वतंत्रता की शताब्दी तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का राष्ट्रीय संकल्प।

इसके केंद्र में बुनियादी ढांचा, हरित ऊर्जा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, कौशल विकास, महिला नेतृत्व, युवा शक्ति और सामाजिक समावेशन जैसे क्षेत्र हैं।

यह लक्ष्य केवल सरकार की योजनाओं से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए नागरिकों, उद्यमियों, किसानों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी आवश्यक होगी।

“सेवा संकल्प” का व्यापक अर्थ भी यही है-

अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचे,

विकास से आत्मविश्वास बढ़े,

आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता आए,

और आत्मनिर्भर भारत विश्व के साथ साझेदारी करते हुए विश्व कल्याण में योगदान दे।

25 वर्षों की इस यात्रा का मूल्यांकन अलग-अलग नागरिक अपने अनुभव और दृष्टिकोण के आधार पर कर सकते हैं। लेकिन यह निर्विवाद तथ्य है कि 7 अक्टूबर 2001 से प्रारंभ हुई सरकार के प्रमुख के रूप में नरेंद्र मोदी की यात्रा भारतीय सार्वजनिक जीवन के सबसे दीर्घकालिक समकालीन अध्यायों में से एक बन चुकी है। 10 जून 2026 को वे लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड भी पार कर चुके हैं।

अब अगला पड़ाव केवल उपलब्धियों का स्मरण नहीं, बल्कि 2047 के भारत की कल्पना को नागरिक भागीदारी, सुशासन और सतत विकास के ठोस परिणामों में बदलना है।

“सेवा से संकल्प, संकल्प से सिद्धि और अंत्योदय से विश्वोदय—यही 25 वर्षों की यात्रा का व्यापक संदेश है।”

सेवा संकल्प अभियान इसी निरंतर यात्रा को स्मरण करने, उपलब्धियों और चुनौतियों पर विचार करने तथा आने वाले भारत के लिए नागरिक कर्तव्य और सहभागिता का संकल्प लेने का अवसर बने—यही इसकी सार्थकता होगी।

-- सत्या नारायण पोद्दार