टोक्यो 17 जुलाई (कड़वा सत्य) जापान में हाथ, पैर और मुंह के रोग (एचएफएमडी) के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और यह पिछले एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
देश के राष्ट्रीय संक् क रोग संस्थान (एनआईआईडी) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
एनआईआईडी की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार सात जुलाई तक सप्ताह के दौरान देश भर में लगभग 3,000 निगरानी चिकित्सा संस्थानों से 35,960 मामले सामने आए। हाथ, पैर और मुंह का रोग एक अत्यधिक संक् क संक्रमण है। यह एंटरोवायरस जीनस के वायरस के कारण होता है, सबसे आम तौर पर कॉक्ससैकीवायरस। ये वायरस गंदे हाथों या मल से दूषित सतहों के सीधे संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं। यह किसी व्यक्ति की लार, मल या श्वसन स्राव के संपर्क से भी फैल सकता है।
निगरानी सप्ताह के दौरान प्रति चिकित्सा संस्थान औसतन 11.46 मामले सामने आए जो 38 प्रान्तों में प्रति संस्थान पांच मामलों के चेतावनी स्तर से ऊपर रहे।
इस अवधि के दौरान मध्य जापानी प्रान्त मी में प्रति संस्थान सबसे अधिक 25.98 मामले दर्ज किए गए। उसके बाद साइतामा में 18.8 मामले दर्ज किए गए।
एचएफएमडी एक संक् क संक्रमण है जिससे हाथों, पैरों और मुंह के अंदर छाले जैसे चकत्ते बन जाते हैं। मुख्य रूप से यह पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है जो लगभग 90 प्रतिशत मामलों में होते हैं।
इसके लक्षणों में बुखार, भूख न लगना, अस्वस्थ महसूस करना, त्वचा पर चकत्ते और गले में खराश शामिल हैं। जीभ, मसूड़ों और गालों के अंदर मुंह के छाले और अल्सर भी एचएफएमडी संक्रमण का संकेत हो सकते हैं।
जापान का स्वास्थ्य मंत्रालय जनता से इस रोग के प्रसार को रोकने के लिए स्वच्छता उपायों को बढ़ाने का आग्रह कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने लोगों को साबुन से हाथ धोने और तौलिये साझा करने से बचने की सलाह दी, साथ ही कहा कि अल्कोहल-आधारित कीटाणुनाशक एचएफएमडी के खिलाफ कम प्रभावी हैं जो आमतौर पर गर्मियों के दौरान फैलता है।
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कड़वा सत्य/शिन्हुआ
जापान में हाथ, पैर और मुंह की बीमारी के मामले एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंचे


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