भोपाल में सफाई कर्मियों की हड़ताल: दिवाली से पहले कचरे के ढेर में तब्दील हुआ न्यू मार्केट
भोपाल में सफाई कर्मियों की हड़ताल से न्यू मार्केट समेत कई इलाके गंदगी की चपेट में हैं। दिवाली से पहले व्यापारियों और ग्राहकों की बढ़ी मुश्किलें।

राजधानी भोपाल में दिवाली की खुशियों के बीच एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। शहर के सफाई कर्मचारी पिछले दो दिनों से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिसका सीधा असर शहर की स्वच्छता पर पड़ा है। सबसे बुरा हाल भोपाल के सबसे व्यस्त शॉपिंग हब 'न्यू मार्केट' का है, जहां चारों तरफ कचरे के ढेर लग गए हैं। त्योहार के समय जब बाजारों में भीड़ सबसे ज्यादा होती है, तब कचरा संग्रहण वाहनों के सड़क से गायब होने से व्यापारियों और ग्राहकों की मुसीबतें बढ़ गई हैं।
न्यू मार्केट आने वाले ग्राहकों का कहना है कि शहर के इस प्रमुख केंद्र पर गंदगी का नजारा बेहद निराशाजनक है। एक ग्राहक ने बताया कि वह नाश्ते के लिए बाजार आए थे, लेकिन हर तरफ प्लास्टिक और कचरा देखकर हैरान रह गए। वहीं, स्थानीय व्यापारी नजर खान ने दुख जताते हुए कहा कि दिवाली के समय यह बाजार रोशनी और सजावट के लिए जाना जाता था, लेकिन इस बार यह 'कचरा मार्केट' जैसा नजर आ रहा है। सफाई व्यवस्था ठप होने से दुकानों के बाहर गंदगी जमा हो रही है, जिससे व्यापार पर भी असर पड़ रहा है।
वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की मांग
हड़ताल पर गए सफाई कर्मचारियों का कहना है कि नगर निगम प्रशासन उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रहा है। कर्मचारियों ने अपनी मुख्य मांगें इस प्रकार रखी हैं:
- वेतन में बढ़ोतरी: वर्तमान में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को करीब 10,900 रुपये मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग की गई है।
- नियमितीकरण: कई कर्मचारियों का कहना है कि उनसे दो साल बाद नियमित करने का वादा किया गया था, लेकिन वे पिछले 10 सालों से इंतजार कर रहे हैं।
- सुविधाएं: कर्मचारियों ने बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और साप्ताहिक अवकाश की मांग की है। उनका कहना है कि उनसे महीने के 30 दिन बिना किसी छुट्टी के काम कराया जाता है।
एक सफाई कर्मचारी ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि 10 हजार रुपये की मामूली तनख्वाह में परिवार चलाना मुश्किल है, दिवाली जैसे त्योहार पर घर की पुताई तक नहीं हो पाती। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, उनकी हड़ताल जारी रहेगी। फिलहाल, नगर निगम और कर्मचारियों के बीच कोई समाधान नहीं निकला है, जिससे शहर की स्थिति और बिगड़ती जा रही है।