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उत्तराखंड हादसा: FIP ने पीएम मोदी से मांगी 'नेशनल हेलिकॉप्टर सेफ्टी फ्रेमवर्क', सुरक्षा समीक्षा की अपील

उत्तराखंड हेलिकॉप्टर हादसे के बाद फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर नेशनल हेलिकॉप्टर सेफ्टी फ्रेमवर्क बनाने की मांग की है।

Sonu Nigam· 2 Nov, 6:32 PM · 2 मिनट
उत्तराखंड हादसा: FIP ने पीएम मोदी से मांगी 'नेशनल हेलिकॉप्टर सेफ्टी फ्रेमवर्क', सुरक्षा समीक्षा की अपील

उत्तराखंड के जोशीमठ इलाके में हाथी पर्वत के पास हुए दर्दनाक हेलिकॉप्टर हादसे ने एक बार फिर हवाई सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में कैप्टन हिमांशु सबरवाल और पांच यात्रियों की जान चली गई। इस घटना के बाद फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक जरूरी पत्र लिखकर देश में नेशनल हेलिकॉप्टर सेफ्टी फ्रेमवर्क लागू करने और हेलिकॉप्टर ऑपरेशन्स की व्यापक समीक्षा करने की मांग की है।

FIP के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा मानकों को कड़ा करने पर जोर दिया गया है। फेडरेशन ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से एक विशेष 'नेशनल हेलिकॉप्टर सेफ्टी रिव्यू कमेटी' बनाने का आग्रह किया है। इस कमेटी में DGCA, AAIB, FIP, हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है, ताकि 90 दिनों के भीतर एक ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जा सके।

पहाड़ी इलाकों में उड़ानों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

FIP ने संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए तीर्थयात्रा उड़ानों के प्रबंधन की कड़ी आलोचना की है। पत्र में कहा गया है कि उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) जैसे राज्य स्तरीय निकायों द्वारा किए जा रहे विकेंद्रीकृत प्रबंधन के कारण एक 'जिम्मेदारी का शून्य' (Responsibility Vacuum) पैदा हो गया है। फेडरेशन का मानना है कि राष्ट्रीय नियामकों को केवल लाइसेंस देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें सीधे और सक्रिय रूप से निगरानी करनी चाहिए।

सुरक्षा खामियों को उजागर करते हुए FIP ने बताया कि जोखिम भरे पहाड़ी इलाकों में अक्सर सिंगल-इंजन वाले ऐसे हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किए जाते हैं जिनमें ऑटो-पायलट या वेदर रडार जैसी आधुनिक सुविधाएं नहीं होतीं। फेडरेशन ने निम्नलिखित सुधारों की मांग की है:

  • परफॉरमेंस क्लास 3 की जगह परफॉरमेंस क्लास 1 हेलिकॉप्टरों का उपयोग किया जाए।
  • हेलिकॉप्टरों में ऑटो-पायलट, वेदर रडार और एनहांस्ड विजन सिस्टम (EVS) अनिवार्य हो।
  • उड़ानों के लिए दो पायलटों वाला क्रू हो और उनके पास वर्तमान इंस्ट्रूमेंट रेटिंग (IR) हो।
  • पायलटों के लिए अनिवार्य माउंटेन-फ्लाइंग सर्टिफिकेशन और सख्त ट्रेनिंग नियम हों।

FIP ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यावसायिक दबाव और मौसमी लक्ष्यों के कारण पायलट की निर्णय लेने की क्षमता से समझौता नहीं होना चाहिए। यदि पायलट को उड़ान असुरक्षित लगती है, तो उसे उड़ान रोकने का पूरा अधिकार होना चाहिए। अंत में, फेडरेशन ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ सीधी बैठक की मांग की है ताकि वे अपनी पेशेवर विशेषज्ञता के जरिए देश की हवाई सुरक्षा को बेहतर बनाने में योगदान दे सकें।

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