IAF का बड़ा कदम: भविष्य की जंग के लिए तैयार किया ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम्स का रोडमैप

भारतीय वायु सेना (IAF) ने आधुनिक युद्ध कौशल को नई दिशा देने के लिए एक बड़ी पहल की है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में वायु सेना ने 'ड्रोन फेडरेशन इंडिया' (DFI) के साथ मिलकर एक विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय वायु सेना के 'अनमैन्ड एंड ऑटोनॉमस सिस्टम्स रोडमैप' को उद्योग जगत के सामने रखना था, ताकि भविष्य की हवाई चुनौतियों से निपटने के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित की जा सके।
इस वर्कशॉप में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह और डिफेंस इंडस्ट्री के 100 से अधिक दिग्गजों ने हिस्सा लिया। जैसे-जैसे युद्ध के मैदान में ऑटोनॉमी, मानव-मानवरहित टीमिंग और स्वाम ऑपरेशंस (झुंड में ड्रोन का हमला) का महत्व बढ़ रहा है, वायु सेना ने अपनी जरूरतों को सीधे इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स के सामने रखा है।
16 प्लेटफॉर्म और चार स्तरों पर फोकस
वायु सेना का यह रोडमैप, जिसे पहले 'ड्रोनथॉन' में पेश किया गया था, काफी व्यापक है। इसमें 16 अलग-अलग प्लेटफॉर्म परिवारों की जरूरतों को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है: स्ट्रैटेजिक, ऑपरेशनल, टैक्टिकल और डिस्ट्रिब्यूटेड/एट्रिटेबल। इस पहल का मकसद स्टार्टअप्स, अकादमिक संस्थानों और आरएंडडी केंद्रों को यह समझाना है कि उनका काम वायु सेना की दीर्घकालिक जरूरतों के साथ कैसे तालमेल बिठा सकता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एयर मार्शल प्रेमकुमार कृष्णस्वामी (DG वेपन सिस्टम्स) ने कहा कि वायु सेना भारत में अनमैन्ड सिस्टम्स को अपनाने में सबसे आगे रही है और आने वाले समय में भी ऑटोनॉमी और स्वाम ऑपरेशंस के मामले में अग्रणी बनी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी जरूरतों को साफ तौर पर बताकर वायु सेना चाहती है कि सही तकनीक का विकास समय पर हो और उन्हें जल्द से जल्द सेना में शामिल किया जा सके।
वहीं, एयर वाइस मार्शल आशीष कुमार ने जोर देकर कहा कि अब हवाई अभियानों की योजना बनाने और उन्हें चलाने में अनमैन्ड सिस्टम्स केंद्र बिंदु बन रहे हैं। अगर इंडस्ट्री को ऑपरेशनल जरूरतों की जानकारी पहले मिल जाती है, तो वे अधिक विश्वसनीय और प्रासंगिक सिस्टम बना पाएंगे।
ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे भारत के ड्रोन इकोसिस्टम को स्पष्ट दिशा मिलेगी। अब स्टार्टअप्स और इंडस्ट्री आत्मविश्वास के साथ निवेश कर सकेंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वदेशी क्षमताओं का निर्माण होगा। यह पहल रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को और मजबूत करेगी।
सुरक्षा कारणों से, इस रोडमैप की कॉपी केवल उन इंडस्ट्री पार्टिसिपेंट्स को दी जाएगी जो एक औपचारिक सत्यापन प्रक्रिया और नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (NDA) की शर्तों को पूरा करेंगे।