सिंगरौली : जिले के कोतवाली थाना अंतर्गत स्पेशल ब्रांच (विशेष शाखा) में तैनात प्रधान आरक्षक राकेश गंगले ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मृतक जवान का शव कार्यालय के एक कमरे में पंखे से झूलता हुआ बरामद किया गया।
घटना की खबर मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अमला तुरंत मौके पर पहुंचा। तहसीलदार की मौजूदगी में पंचनामा तैयार कर शव को पंखे से नीचे उतारा गया और पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेज दिया गया है।
सुसाइड नोट में छलका दर्द: "परिवार से दूरी और ट्रांसफर न मिलना बनी वजह"
पुलिस को मृतक के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुसाइड नोट में राकेश गंगले ने अपनी मौत के लिए पुलिस विभाग की उपेक्षा को जिम्मेदार ठहराया है।
मूल रूप से खरगौन जिले के रहने वाले राकेश ने लिखा कि सिंगरौली से उनके गृह जिले खरगोन की दूरी लगभग 1000 किलोमीटर है। लंबे समय से परिवार से दूर रहने के कारण वे मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। उन्होंने अपने ट्रांसफर के लिए गृह जिले या आसपास के क्षेत्र में पोस्टिंग हेतु कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाई और आवेदन दिए, लेकिन विभाग ने उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।
अधिकारियों का बयान और आगे की कार्रवाई
मामले की पुष्टि करते हुए नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) ललित बैरागी ने बताया: "पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। तहसीलदार की उपस्थिति में शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया है। सुसाइड नोट में उल्लेखित सभी बिंदुओं और आरोपों की बारीकी से जांच की जा रही है। मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है, जिनके देर रात तक सिंगरौली पहुंचने की संभावना है। परिजनों के आने के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।" इस दुखद घटना ने पुलिस कर्मियों में बढ़ते मानसिक दबाव और स्थानांतरण प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।





