संस्थाएं दबाव में हैं और विरोध बर्दाश्त नहीं होता: अशोक गहलोत
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि देश में विरोध बर्दाश्त नहीं किया जा रहा और चुनाव आयोग समेत कई संस्थाएं दबाव में हैं।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गहलोत ने आरोप लगाया कि देश में असहमति की जगह नहीं बची है और जो कोई भी सवाल पूछता है, उसे गद्दार करार दे दिया जाता है।
गहलोत ने सीधे तौर पर यह दावा किया कि देश की महत्वपूर्ण संस्थाएं, जिनमें न्यायपालिका, जांच एजेंसियां और चुनाव आयोग शामिल हैं, भारी दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की स्थिति वैसी नहीं है जैसी होनी चाहिए। उनके अनुसार, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने वाली संस्थाओं का दबाव में होना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
युवा पीढ़ी को इतिहास समझने की सलाह
इस दौरान अशोक गहलोत ने 'जेन-जी' (Gen-Z) यानी आज की युवा पीढ़ी से अपील की कि वे अपनी विचारधारा बनाने से पहले देश के राजनीतिक इतिहास का अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह देखना चाहिए कि कांग्रेस और बीजेपी जैसी पार्टियों की क्या सोच रही है और उनके पूर्वजों का क्या रिकॉर्ड रहा है। गहलोत के मुताबिक, तथ्यों और सच्चाई को जाने बिना देश की सही सेवा करना संभव नहीं है।
दूसरी ओर, राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस रैली को ऐतिहासिक बताते हुए दावा किया कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए करीब 10 लाख लोग दिल्ली जुटेंगे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में होने वाला यह प्रदर्शन देश के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।
डोटासरा ने इस आंदोलन को आगामी चुनावों से जोड़ते हुए कहा कि यह रैली 2028 में राजस्थान में कांग्रेस सरकार और 2029 में राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन की सरकार बनाने का रास्ता साफ करेगी। उन्होंने इसे बीजेपी और एनडीए के लिए उल्टी गिनती की शुरुआत बताया।
गौरतलब है कि विपक्षी INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 'चलो दिल्ली रामलीला मार्च' का आयोजन किया है, जिसमें मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया जा रहा है।