औरंगाबाद: सरकारी दर्जे की मांग को लेकर बेलट्रॉन कर्मचारियों ने निकाला रोड मार्च
औरंगाबाद में बेलट्रॉन कर्मियों ने सड़क मार्च निकालकर राज्य सरकार से नियमितीकरण की मांग की है। मांगें न मानने पर हड़ताल की चेतावनी दी।

बिहार के औरंगाबाद जिले में रविवार को बेलट्रॉन के माध्यम से कार्यरत कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बिहार राज्य डेटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले जुटे डेटा एंट्री ऑपरेटरों, प्रोग्रामर्स और स्टेनोग्राफरों ने सड़क पर उतरकर राज्य सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। इन कर्मियों की मुख्य मांग है कि उन्हें राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों का दर्जा दिया जाए।
यह प्रदर्शन जिले के दानी बीघा से शुरू होकर कर्मा मोड़ तक चला, जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों और कार्यालयों में तैनात 100 से अधिक कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सालों से सरकारी तंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन आज भी उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है।
तीन दशक की सेवा के बाद भी अनिश्चित भविष्य
संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष आलोक कुमार पांडे और सचिव विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि कई कर्मचारी पिछले करीब 30 वर्षों से सरकारी कार्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से उनकी सेवा शर्तों और नौकरी की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के पास उन कर्मचारियों को नियमित करने का अधिकार है जिन्होंने लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों में काम किया है। उनका तर्क है कि आउटसोर्सिंग का मॉडल ऐसे स्थायी कार्यों के लिए सही नहीं है।
प्रदर्शन में शामिल कोषाध्यक्ष रामजी सिंह और अन्य सदस्यों ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा सरकार की सेवा में लगा दिया है और अब उनकी उम्र अन्य नौकरियों के लिए निर्धारित सीमा से अधिक हो चुकी है।
कर्मचारियों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे काली पट्टी बांधकर विरोध मार्च निकालेंगे। साथ ही, उन्होंने ऐलान किया है कि यदि समाधान नहीं निकला तो 15 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।