नकली 20 रुपये के सिक्कों का बड़ा खेल, दिल्ली पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 6 को दबोचा
दिल्ली पुलिस ने ₹20 के नकली सिक्के बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मास्टरमाइंड समेत 6 लोग गिरफ्तार, भारी मात्रा में सिक्के बरामद।

राजधानी दिल्ली में पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बाजार में नकली 20 रुपये के सिक्के खपाने का काम कर रहा था। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और उसके साथियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान करीब 1 लाख रुपये फेस वैल्यू के नकली सिक्के बरामद किए हैं, जिन्हें 100-100 सिक्कों के 50 पाउच में रखा गया था।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने 8 सितंबर 2026 को बाहरी दिल्ली के मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के पास से 45 वर्षीय पारस जैन को गिरफ्तार किया। पारस से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने इस नेटवर्क के असली मास्टरमाइंड उपकार लूथरा (58 वर्ष) तक अपनी पहुंच बनाई, जो पंजाब के जीरकपुर का रहने वाला है। जांच में सामने आया कि लूथरा पिछले दो दशकों से इस काले कारोबार को चला रहा था और पहले अपने भाई स्वीकार के साथ मिलकर यह काम करता था।
यूपी के सहारनपुर से हुई मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी
पुलिस की टीम ने तत्परता दिखाते हुए उपकार लूथरा और उसके चार अन्य साथियों—अनुराग पाल, जनार्दन कुमार चौरसिया, कुलदीप और हिमांशु को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब यह गिरोह अपनी सिक्का बनाने वाली फैक्ट्री को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने की फिराक में था।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि यह गिरोह नकली सिक्कों को भारी डिस्काउंट पर बेचता था। उदाहरण के तौर पर, 1 लाख रुपये की फेस वैल्यू वाले नकली सिक्कों को करीब 70,000 रुपये में बेचा जाता था। इन सिक्कों को मुख्य रूप से शराब की दुकानों, टोल प्लाजा और किराने की दुकानों के जरिए बाजार में घुसाया जाता था ताकि किसी को शक न हो।
डीसीपी (क्राइम) हर्ष इंदोरा ने बताया कि उपकार लूथरा पुराना अपराधी है और 2017 में भी दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने उसे 5 और 10 रुपये के नकली सिक्के बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। फिलहाल, क्राइम ब्रांच ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों से पूछताछ जारी है ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।