बिना बीज वाला परवल: बिहार कृषि विश्वविद्यालय की नई खोज से किसानों की बढ़ी कमाई
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने परवल की ऐसी किस्म तैयार की है जिसमें बीज नहीं हैं, जिससे किसानों की कमाई बढ़ रही है।

बिहार के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के वैज्ञानिकों ने परवल की एक ऐसी खास किस्म विकसित की है, जिसमें बीज नहीं के बराबर हैं। इस नई किस्म के आने से न केवल उपभोक्ताओं की पसंद बढ़ी है, बल्कि किसानों की आमदनी में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है। इस किस्म की मांग अब सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी तेजी से बढ़ रही है।
विश्वविद्यालय के डॉक्टर डी.आर. सिंह ने बताया कि इस विशेष किस्म को तैयार करने में वैज्ञानिकों को पांच साल से ज्यादा का समय लगा है। असल में, यह पूरी तरह से बीज रहित तो नहीं है, लेकिन इसके बीज इतने छोटे और नरम होते हैं कि खाते समय महसूस ही नहीं होते। कुछ परवल तो पूरी तरह बिना बीज के भी होते हैं, इसी वजह से आम बोलचाल में इसे 'बिना बीज वाला परवल' कहा जा रहा है।
बाजार में बढ़ी डिमांड और बेहतर स्टोरेज
इस नई किस्म के परवल की सबसे बड़ी खासियत इसका आकर्षक हरा रंग और लंबा आकार है। साथ ही, इसकी स्टोरेज क्षमता सामान्य परवल के मुकाबले कहीं ज्यादा है, जिसका मतलब है कि यह जल्दी खराब नहीं होता। इस खूबी की वजह से व्यापारी इसे अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं और बाजार में इसकी ऊंची कीमतें मिल रही हैं।
परवल एक लोकप्रिय सब्जी है, लेकिन अक्सर लोग इसके सख्त बीजों की वजह से इसे नापसंद करते थे। अब इस नरम बीज वाली किस्म ने ग्राहकों की इस समस्या को हल कर दिया है। बिहार के कई जिलों के साथ-साथ अब पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी इस किस्म की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। यह नवाचार किसानों, व्यापारियों और ग्राहकों, तीनों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।