शिक्षा

CBSE बोर्ड एग्जाम में कैलकुलेटर की मांग, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और बोर्ड से मांगा जवाब

दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देने वाली याचिका पर केंद्र और CBSE से जवाब मांगा है।

Sonu Nigam· 4 Nov, 4:31 PM · 2 मिनट
CBSE बोर्ड एग्जाम में कैलकुलेटर की मांग, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और बोर्ड से मांगा जवाब

कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षाओं में कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देने की मांग अब कानूनी लड़ाई में बदल गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), एनसीईआरटी (NCERT) और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। यह कदम एक जनहित याचिका (PIL) के बाद उठाया गया है, जिसमें छात्रों के मानसिक दबाव और समय की कमी का मुद्दा उठाया गया है।

पीतमपुरा निवासी विशाल दुआ और 10 अन्य अभिभावकों ने वकील नितिन मंगला के जरिए यह याचिका दायर की है। एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया है।

लंबी कैलकुलेशन से समय की बर्बादी का आरोप

याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि अकाउंटेंसी और गणित जैसे विषयों में छात्रों को बहुत लंबी और जटिल गणनाएं (calculations) करनी पड़ती हैं। इस वजह से छात्रों का काफी समय सिर्फ हिसाब-किताब लगाने में निकल जाता है, जिससे वे अपने कॉन्सेप्ट्स और विषय की गहरी समझ को पेपर में साबित नहीं कर पाते। याचिका में मांग की गई है कि कम से कम अकाउंटेंसी की परीक्षा में बेसिक और नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए, जबकि गणित के मामले में किसी विशेषज्ञ बॉडी से इस पर विचार कराया जाए।

हैरानी की बात यह है कि याचिका में दावा किया गया है कि सीबीएसई की करिकुलम कमेटी ने खुद नवंबर 2024 की बैठक में अकाउंटेंसी परीक्षा में बेसिक कैलकुलेटर की अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसे दिसंबर 2024 में गवर्निंग बॉडी के सामने भी रखा गया था, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया।

इसके अलावा, याचिका में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 का हवाला देते हुए कहा गया है कि आधुनिक शिक्षा का जोर रटने के बजाय वैचारिक समझ और उच्च स्तरीय सोच पर होना चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि डिस्कैलकुलिया (गणना संबंधी विकार) से जूझ रहे छात्रों को मिलने वाली कैलकुलेटर की सुविधा को अन्य दिव्यांग श्रेणियों के छात्रों तक भी बढ़ाया जाए।

अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने अगस्त 2026 में इस संबंध में सीबीएसई और अन्य अधिकारियों को विस्तृत आवेदन दिया था, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब सबकी नजरें सीबीएसई और केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी हैं।

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