बिहार

बिहार के 135 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अब बने 30 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

बिहार सरकार ने 135 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बदला है, अब ग्रामीणों को घर के पास मिलेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर।

Sonu Nigam· 3 Nov, 6:44 PM · 2 मिनट
बिहार के 135 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अब बने 30 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

बिहार के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ी खुशखबरी आई है। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित 135 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को अब 30 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में बदल दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे अब गांव के लोगों को इलाज के लिए दूर शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ग्रामीण मरीजों को अब अपने घर के नजदीक ही बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। इन केंद्रों में न केवल बेड की संख्या बढ़ाई गई है, बल्कि जरूरी चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती पर भी खास जोर दिया गया है। सरकार की 'सात निश्चय-3' योजना के तहत इन 135 केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की होगी तैनाती, घटेगा जिला अस्पतालों का बोझ

इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सबसे खास बात यह है कि अब यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध होंगी। सरकार ने प्रत्येक केंद्र में हड्डी रोग, नेत्र रोग और नाक-कान-गला (ENT) विशेषज्ञों के पद सृजित किए हैं। इससे ग्रामीण मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का इलाज मिल सकेगा।

इन केंद्रों के सुचारू संचालन के लिए कुल 24 श्रेणियों में 47 पदों का निर्धारण किया गया है। इसमें शामिल हैं:

  • उपाधीक्षक और विशेषज्ञ चिकित्सक
  • सामान्य चिकित्सक और जीएनएम नर्स
  • वरिष्ठ फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन
  • फिजियोथेरेपिस्ट और अस्पताल प्रबंधन स्टाफ
  • डेंटल हाइजीनिस्ट और ड्रेसर

यह सुविधा पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, भागलपुर, अररिया, औरंगाबाद, बेगूसराय, भोजपुर, गोपालगंज, कटिहार, मधुबनी, समस्तीपुर और वैशाली समेत राज्य के सभी 38 जिलों के विभिन्न प्रखंडों में लागू की गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस पहल से जिला अस्पतालों पर मरीजों का भारी दबाव कम होगा और आम जनता को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा।

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