मुजफ्फरपुर PNG ब्लास्ट: IOCL के बड़े अधिकारियों समेत 11 लोगों के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दायर
मुजफ्फरपुर में हुए पीएनजी पाइपलाइन विस्फोट मामले में IOCL के बड़े अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है।
बिहार के मुजफ्फरपुर में हुए भीषण पीएनजी गैस पाइपलाइन विस्फोट मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस हादसे में बड़ी लापरवाही का आरोप लगाते हुए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के शीर्ष अधिकारियों समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है। जनहित मंच के सचिव और अधिवक्ता सुशील कुमार सिंह ने यह कदम उठाया है, ताकि इस दर्दनाक घटना के असली जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सके।
यह पूरा मामला गोबरसही-डुमरी रोड का है, जहां 2 नवंबर को दोपहर करीब 12:20 बजे एक भयानक हादसा हुआ था। बताया जा रहा है कि नाला निर्माण के दौरान जब जेसीबी से खुदाई की जा रही थी, तभी जमीन के नीचे दबी पीएनजी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। आरोप है कि करीब 45 मिनट तक गैस का रिसाव होता रहा, लेकिन अधिकारियों ने समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, जिसके बाद भीषण विस्फोट हुआ। इस धमाके में एक व्यक्ति की जान चली गई और कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए, साथ ही आसपास की दुकानों और मकानों को भारी नुकसान पहुंचा।
इन अधिकारियों पर लगा लापरवाही का आरोप
कोर्ट में दाखिल परिवाद में आरोपियों की सूची काफी लंबी है। इसमें IOCL के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य प्रमुख, पीएनजी प्रोजेक्ट हेड और तकनीकी-सुरक्षा अधिकारियों को नामजद किया गया है। इनके अलावा पथ निर्माण विभाग के इंजीनियरों, नाला निर्माण एजेंसी के प्रोपराइटर और जेसीबी चालक को भी आरोपी बनाया गया है।
अधिवक्ता का दावा है कि खुदाई शुरू करने से पहले न तो गैस कंपनी से पाइपलाइन का नक्शा लिया गया और न ही उसकी गहराई और सुरक्षा निर्देशों की जानकारी जुटाई गई। साथ ही, पथ निर्माण विभाग और निर्माण एजेंसी ने भी बिना आवश्यक अनुमति और सुरक्षा प्रक्रियाओं के काम शुरू कर दिया, जो सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही है।
परिवाद में यह आशंका भी जताई गई है कि पुलिस की जांच केवल मौके पर मौजूद कर्मचारियों तक सीमित रह सकती है, जबकि असली जिम्मेदारी उन बड़े अधिकारियों की है जो निगरानी और फैसले लेते हैं। कोर्ट से मांग की गई है कि IOCL से पाइपलाइन के सुरक्षा ऑडिट, रखरखाव और नक्शे से जुड़े रिकॉर्ड मांगे जाएं। साथ ही, मृतक के परिजनों और घायलों को उचित मुआवजा दिलाने और घनी आबादी वाले इलाकों में ऐसी पाइपलाइनों का तकनीकी सुरक्षा ऑडिट कराने की अपील की गई है।