बिहार

सुपौल: जल-जीवन-हरियाली दिवस पर गूंजा संरक्षण का संदेश, जन आंदोलन बनाने की अपील

सुपौल में जल-जीवन-हरियाली दिवस मनाया गया। अधिकारियों ने जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को जन आंदोलन बनाने की अपील की।

Sonu Nigam· 3 Nov, 3:45 PM · 1 मिनट
सुपौल: जल-जीवन-हरियाली दिवस पर गूंजा संरक्षण का संदेश, जन आंदोलन बनाने की अपील

बिहार के सुपौल जिले में पर्यावरण की रक्षा और पानी की एक-एक बूंद बचाने के संकल्प के साथ 'जल-जीवन-हरियाली दिवस' का आयोजन किया गया। जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद लोगों को जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि अगर हमें आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देना है, तो जल संचयन और वर्षा जल संरक्षण को अपनी आदत बनाना होगा। वक्ताओं ने भू-जल स्तर में गिरावट पर चिंता जताते हुए कहा कि पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और बड़े पैमाने पर पौधारोपण करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

सरकारी प्रयासों के साथ जन भागीदारी जरूरी

आयोजन में मौजूद वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी योजनाओं से पर्यावरण का संतुलन नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जल और हरित संसाधनों का संरक्षण तभी संभव है जब आम जनता इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाए। इस अभियान को एक सरकारी कार्यक्रम के बजाय 'जन आंदोलन' का रूप देने की जरूरत है ताकि हर नागरिक अपनी सामूहिक जिम्मेदारी को समझे।

इस मौके पर डीआरडीए के निदेशक (एनईपी) अनित कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी संजय कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (विकसित भारत) कृष्ण कांत सिंह, मत्स्य विकास पदाधिकारी शक्ति रंजन सहित पंचायती राज के प्रतिनिधि और डीआरडीए के तकनीकी सहायक वरुण देव राय जैसे कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर लोगों से अपील की कि वे जल-जीवन-हरियाली अभियान के उद्देश्यों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं और प्रकृति को बचाने में अपना योगदान दें।

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