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भारत को चाहिए 3 नेशनल एयरलाइंस, तभी ग्लोबल लेवल पर होगी टक्कर: अडानी एयरपोर्ट्स CEO

अडानी एयरपोर्ट्स के CEO अरुण बंसल ने वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने के लिए भारत में तीन बड़ी नेशनल एयरलाइंस की जरूरत बताई है।

Sonu Nigam· 3 Nov, 2:56 PM · 2 मिनट
भारत को चाहिए 3 नेशनल एयरलाइंस, तभी ग्लोबल लेवल पर होगी टक्कर: अडानी एयरपोर्ट्स CEO

भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए देश को तीन नेशनल एयरलाइंस की जरूरत है। यह बात अडानी एयरपोर्ट्स के CEO अरुण बंसल ने 'दिल्ली एविएशन इंडिया 2026' कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के सामने अपनी जगह बनाने के लिए पहले घरेलू एयरलाइंस को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना जरूरी है।

अरुण बंसल के मुताबिक, भारत का यात्री आधार बहुत तेजी से बढ़ रहा है और इसे संभालने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत तीन नेशनल एयरलाइंस का हकदार है। उनके अनुसार, इंडिगो और एयर इंडिया को तो नेशनल करियर माना जा सकता है, लेकिन देश को एक तीसरी ऐसी एयरलाइन की जरूरत है जो आकार और क्षमता में इन दोनों के बराबर हो।

2045 तक यात्रियों की संख्या होगी 1.2 अरब

बंसल ने भविष्य के आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में पैसेंजर ट्रैफिक करीब चार गुना बढ़ने का अनुमान है। वर्तमान में यह संख्या 300 मिलियन के आसपास है, जो 2040-45 तक बढ़कर 1.1 से 1.2 बिलियन तक पहुंच सकती है। इस भारी बढ़ोतरी को सपोर्ट करने के लिए उन्होंने तीन मुख्य बातों पर जोर दिया: विमानों की संख्या में बढ़ोतरी, एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और जरूरी रेगुलेटरी बदलाव।

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि भारतीय यात्री अभी भी यूरोप और अमेरिका जाने के लिए मिडिल ईस्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय हब पर निर्भर हैं। अगर भारत अपनी एयरलाइंस के बेड़े को बढ़ाता है और एयरपोर्ट क्षमता में सुधार करता है, तो सीधी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि 'ओपन स्काई' पॉलिसी अपनाने से पहले भारतीय एयरलाइंस को सुरक्षित करना और उन्हें मजबूत बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि अडानी एयरपोर्ट्स अगले सात वर्षों में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, नॉन-एरोनॉटिकल बिजनेस और सिटी-साइड डेवलपमेंट में 10-11 बिलियन डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहा है। कंपनी का लक्ष्य अगले 10 साल में अपने प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की संख्या 100 मिलियन से बढ़ाकर 300 मिलियन करना है।

इसके अलावा, उन्होंने जानकारी दी कि कंपनी सरकार द्वारा 11 एयरपोर्ट्स के अगले निजीकरण दौर में भी हिस्सा लेगी। नवी मुंबई एयरपोर्ट के दूसरे फेज के काम में तेजी लाई जा रही है, ताकि 2030 तक इसकी क्षमता 50 मिलियन यात्रियों तक पहुंच सके। वहीं, मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 के पुनर्विकास से कुल क्षमता 55 मिलियन से बढ़कर करीब 65 मिलियन होने की उम्मीद है।

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